मंदसौर: डुंगरखेड़ी में नकली दूध बनाने का अड्डा ध्वस्त, भारी सामग्री जब्त
गरोठ के डुंगरखेड़ी गांव में पुलिस ने दो आरोपियों के घर से यूरिया, मिल्क पाउडर और उपकरण जब्त किए। चार माह में यह चौथा मामला...

गरोठ मंदसौर | संवाददाता: राजकुमार कोटवार
द क्लिफ न्यूज़ | गरोठ | 29 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में दूध की शुद्धता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गरोठ तहसील के डुंगरखेड़ी गांव में एक बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस ने कथित तौर पर नकली दूध बनाने के एक अड्डे का भंडाफोड़ करते हुए दो सगे भाइयों कृष्णपाल सिंह और शिवराज सिंह, दोनों पिता बद्री सिंह, के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोपियों के घर और बाड़े से नकली दूध बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री जब्त की गई है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिले की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की लचर निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले चार महीनों में यह इस तरह का चौथा मामला है, जो जिले के ग्रामीण अंचलों में मिलावट के इस कारोबार के फैलाव को दर्शाता है। इससे पहले चाचवदापटारी, बरडिया आमरा और कोटड़ा बुजुर्ग जैसे गांवों में भी इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि आखिर गांव-गांव में यह संदिग्ध कारोबार कैसे संचालित हो रहा है और जिम्मेदार विभाग समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं जुटा पाते।
नकली दूध बनाने की सामग्री जब्त
पुलिस की छापेमारी के दौरान, डुंगरखेड़ी निवासी कृष्णपाल सिंह और शिवराज सिंह के ठिकाने से बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री बरामद हुई है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर नकली दूध तैयार करने में किया जाता है। जब्त की गई सामग्रियों में 25 किलोग्राम के छह कट्टे मिल्क पाउडर, 15 लीटर की क्षमता वाले वनस्पति तेल के पांच टीन, 14 खाली टीन के डिब्बे और एक इलेक्ट्रॉनिक फिल्टर मिक्सर मशीन शामिल है। इसके अलावा, एक गैस भट्ठा, एक एचपी कंपनी का गैस सिलेंडर और यूरिया के चार कट्टे भी जब्त किए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि जब्त की गई सामग्री की जांच और पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल के बाद ही नकली दूध बनाने की प्रक्रिया और उसमें इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के वास्तविक स्वरूप के बारे में पुख्ता जानकारी मिल पाएगी।
खाद्य सुरक्षा पर गंभीर चिंता
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बावजूद मिलावटखोरों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं, जो आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। बार-बार हो रही कार्रवाई के बावजूद इस धंधे पर अंकुश नहीं लग पा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है। यह घटनाक्रम जिले में खाद्य सुरक्षा के सरकारी दावों की पोल खोल रहा है और यह सवाल खड़ा कर रहा है कि उपभोक्ताओं तक शुद्ध दूध पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। इस मामले में आगे विभाग द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
