मानदेय वृद्धि नहीं तो 28 सितंबर से लखनऊ में धरना: तकनीकी सहायक
महोबा में मनरेगा कर्मियों ने पांच वर्षों से मानदेय न बढ़ने पर नाराजगी जताई। मांगों पर कार्रवाई न होने पर 28 सितंबर से ईको गार्डन...

MAHOBA | संवाददाता: अभिनय सिंह चंदेल
द क्लिफ न्यूज़ | महोबा | 24 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के महोबा में मनरेगा, विकसित भारत गारंटी और ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों ने अपने मानदेय में वृद्धि और यात्रा भत्ता की मांग को लेकर आंदोलन की राह पकड़ ली है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और मुख्य विकास अधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर अपनी लंबित समस्याओं के त्वरित समाधान की अपील की है।
तकनीकी सहायकों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई में लगातार वृद्धि हुई है। इससे उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनका कार्य केवल प्राक्कलन (estimates) तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें ग्राम पंचायतों में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का नियमित निरीक्षण और पर्यवेक्षण भी करना पड़ता है।
मानदेय और यात्रा भत्ते की प्रमुख मांगें
इन कर्मचारियों को अपने कार्यक्षेत्र में भ्रमण के लिए प्रतिदिन यात्रा करनी पड़ती है, जिस पर उनका प्रतिमाह औसतन छह हजार रुपये पेट्रोल पर खर्च होता है। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को देखते हुए, तकनीकी सहायकों ने मांग की है कि उनके मानदेय को जूनियर इंजीनियर के न्यूनतम वेतनमान के बराबर, यानी 45 हजार रुपये प्रति माह किया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रतिदिन के भ्रमण के लिए यात्रा भत्ते की भी मांग की है।
समय-सीमा और आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारियों के संगठन ने शासन को अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए 26 सितंबर 2026 तक का समय दिया है। यदि निर्धारित समय-सीमा तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वे 28 सितंबर से लखनऊ स्थित ईको गार्डन में प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है। इस ज्ञापन सौंपने के अवसर पर रवि कुमार त्रिपाठी, बाबूलाल, महेश्वरी प्रसाद, प्रवीण कुमार गुप्ता, राजेश नामदेव, अखिलेश रविंद्र पटैरिया, सूरज सिंह, केशव बाबू, बृज बिहारी, बृजेंद्र मिश्रा, नारायण दास और देवेश सहित कई अन्य तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।
तकनीकी सहायकों ने सरकार से ग्रामीण विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के निष्पादन में अहम कड़ी हैं और उनकी सेवाओं का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
