मदनापुर प्राथमिक विद्यालय में प्रभावी शिक्षण पर सहयोगात्मक पर्यवेक्षण
बरेली के प्राथमिक विद्यालय मदनापुर में लेंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा सहयोगात्मक पर्यवेक्षण किया गया, जिसमें शिक्षकों को बाल-केंद्रित गणित शिक्षण की नई दिशाएं मिलीं।

अफसार खान संवाददाता बरेली | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 6 अक्टूबर 2026
बरेली के विकास खंड मीरगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय मदनापुर में लेंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (Language and Learning Foundation) द्वारा एक महत्वपूर्ण सहयोगात्मक पर्यवेक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, विशेषकर गणित जैसे विषयों में, नवाचार के माध्यम से छात्रों की समझ को बेहतर बनाने में सहायता प्रदान करना था। यह पहल शिक्षकों को नवीनतम शैक्षणिक तकनीकों से अवगत कराने और प्राथमिक शिक्षा के स्तर को उन्नत करने में सहायक सिद्ध हो रही है, जो कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस शैक्षणिक गतिविधि के दौरान, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शबाना खान ने कक्षा एक की अध्यापिका सुनीता बजाज द्वारा संदर्शिका (गाइड) आधारित नवाचारी पद्धतियों के उपयोग का सूक्ष्म अवलोकन किया। अध्यापिका बजाज ने छात्रों में गणितीय अवधारणाओं की गहरी समझ विकसित करने के लिए इन पद्धतियों का प्रभावी ढंग से प्रयोग किया। संदर्शिकाएँ शिक्षकों के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में कार्य करती हैं, जो उन्हें कक्षा में विभिन्न शिक्षण-अधिगम गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने में मदद करती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि सीखने की प्रक्रिया सुसंगत और प्रभावी बनी रहे। अकादमिक संदर्भदाता पूनम देवी के साथ मिलकर, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शबाना खान ने संपूर्ण कक्षा शिक्षण का गहनता से आकलन किया, जिसमें बच्चों की सहभागिता, उनकी समझ के स्तर और शिक्षकों द्वारा उपयोग की जा रही विधियों का मूल्यांकन शामिल था।
बाल-केंद्रित शिक्षण पर जोर
पर्यवेक्षण के दौरान, बच्चों के वास्तविक सीखने के स्तर का विस्तृत आकलन किया गया। इसमें छात्रों द्वारा गणितीय समस्याओं को हल करने की क्षमता, अवधारणाओं की उनकी समझ और कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शबाना खान ने शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और बाल-केंद्रित बनाने के लिए शिक्षकों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शिक्षण विधियां प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप हों, जिससे उनकी गणितीय समझ को प्रभावी ढंग से विकसित किया जा सके। बाल-केंद्रित दृष्टिकोण का अर्थ है कि शिक्षक छात्रों की रुचियों, क्षमताओं और सीखने की शैलियों को ध्यान में रखते हुए अपनी शिक्षण रणनीतियों को अपनाते हैं। यह दृष्टिकोण छात्रों को सीखने की प्रक्रिया में अधिक सक्रिय रूप से शामिल करता है और उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ाता है।
शिक्षकों को प्रोत्साहन एवं भविष्य की रणनीति
इस महत्वपूर्ण सत्र में शिक्षक अमित कुमार, वीर सिंह और हरपाल भी उपस्थित रहे। पर्यवेक्षण के माध्यम से, सभी शिक्षकों को बेहतर शिक्षण रणनीतियों को अपनाने और बच्चों की व्यक्तिगत सीखने की गति एवं आवश्यकताओं के अनुसार कार्य करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया गया। यह सहयोगात्मक पर्यवेक्षण न केवल वर्तमान शिक्षण प्रथाओं का मूल्यांकन करने का एक अवसर था, बल्कि भविष्य के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया। शिक्षकों को यह समझाया गया कि कैसे वे अपनी कक्षाओं में निरंतर सुधार के लिए इन नई रणनीतियों को लागू कर सकते हैं। विद्यालय प्रशासन ने इस पहल को शिक्षण गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक अत्यंत उपयोगी कदम बताया है। यह सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे छात्रों को बेहतर शैक्षिक अनुभव प्राप्त होता है। लेंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन की यह पहल शिक्षकों को आधुनिक शैक्षणिक तकनीकों से अवगत कराने और प्राथमिक शिक्षा के स्तर को उन्नत करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
