कुरवाई नगर परिषद में शाखा प्रभार को लेकर नियमों की अनदेखी का आरोप
विदिशा के कुरवाई नगर परिषद में स्थापना, लेखा और स्टोर शाखाओं के प्रभार सौंपने में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासनिक आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | विदिशा | 6 अक्टूबर 2026
विदिशा जिले की कुरवाई नगर परिषद में प्रशासनिक नियमों की अनदेखी और महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रभार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि 31 जुलाई 2026 को जारी एक कार्य विभाजन आदेश के तहत स्थापना, लेखा और स्टोर जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार ऐसे कर्मचारियों को सौंपा गया है, जिनकी पात्रता और पदस्थापना नियमों के अनुसार नहीं है। इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के निर्देशों का कथित तौर पर उल्लंघन किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इस आदेश को तुरंत निरस्त करने और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
मामले की जड़ें 8 जुलाई 2026 को नगर परिषद कुरवाई में अस्थाई मुख्य नगर पालिका अधिकारी के तौर पर पदभार ग्रहण करने वाली गीता मांझी से जुड़ी हैं। उनके पदभार ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद, 31 जुलाई 2026 को आदेश क्रमांक स्थापना/2026/1134-1135 के माध्यम से विभिन्न शाखाओं का कार्य विभाजन किया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, स्थापना शाखा का प्रभार एक ऐसे कर्मचारी को दिया गया है, जिसकी स्थायीकर्मी बनाए जाने की प्रक्रिया अभी जांच के दायरे में है। यह चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि स्थापना शाखा में कर्मचारियों की सेवा-पुस्तिकाएं, जांच संबंधी संवेदनशील दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख रखे जाते हैं। ऐसे में, इस शाखा का प्रभार एक योग्य और नियमित कर्मचारी को ही सौंपा जाना चाहिए था।
स्थापना शाखा प्रभार पर जांच का साया
शिकायतकर्ताओं ने इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि संबंधित कर्मचारी के संबंध में संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल संभाग के पत्र क्रमांक 981/भोपाल, दिनांक 6 जून 2025 तथा कलेक्टर विदिशा के पत्र क्रमांक 10850-10851/विदिशा, दिनांक 28 जुलाई 2025 के तहत एक जांच प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में, जिस व्यक्ति पर पहले से ही जांच लंबित है, उसे स्थापना शाखा जैसे संवेदनशील विभाग का प्रभार सौंपना जांच की निष्पक्षता और अभिलेखों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाता है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि इस नियुक्ति से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
लेखा और स्टोर शाखाओं के प्रभार में भी नियमों का उल्लंघन
स्थापना शाखा के अलावा, लेखा शाखा के प्रभार को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। शिकायत में नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के आदेश क्रमांक 17062, दिनांक 6 अगस्त 2025 का हवाला दिया गया है। इस आदेश के अनुसार, लेखा शाखा का प्रभार केवल लेखा परीक्षा उत्तीर्ण, अपेक्षित लेखा योग्यता रखने वाले अथवा वरिष्ठ लिपिक को ही सौंपा जाना चाहिए। इसके विपरीत, आरोप है कि कुरवाई नगर परिषद में लेखा शाखा का कार्य एक भृत्य कर्मचारी, सगीर खान, से करवाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था वित्तीय कार्यों की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
इसी क्रम में, स्टोर शाखा के प्रभार को लेकर भी संचालनालय के निर्देशों की अवहेलना का आरोप है। 14 जुलाई 2026 के आदेश क्रमांक 22172 में यह निर्देश दिया गया था कि जो कर्मचारी तीन वर्ष या उससे अधिक समय से स्टोर संबंधी कार्य कर रहे हैं, उन्हें अन्य शाखाओं में स्थानांतरित किया जाए। इसके बावजूद, आरोप है कि कुरवाई नगर परिषद में फायरमैन रेहान बैग, जो करीब आठ वर्षों से स्टोर शाखा का कार्य देख रहे हैं, उन्हें पुनः इसी शाखा का प्रभार सौंप दिया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि फायरमैन का मूल कर्तव्य अग्निशमन सेवाओं से संबंधित है, और ऐसे में उन्हें स्टोर शाखा का प्रभार दिए जाने के नियम की समीक्षा की जानी चाहिए।
लिखित शिकायत और प्रस्तावित कार्रवाई
इन गंभीर आरोपों के संबंध में 5 अगस्त 2026 को समाचार प्रकाशित होने के बाद, लेखा शाखा का प्रभार मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पास रखने संबंधी एक नया आदेश जारी किए जाने की बात शिकायत में कही गई है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जमीनी हकीकत में अभी भी लेखा शाखा के लिपिकीय कार्य भृत्य कर्मचारी से ही कराए जा रहे हैं। साथ ही, स्थापना और स्टोर शाखाओं के प्रभार में भी कोई अपेक्षित बदलाव नहीं किया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि 31 जुलाई 2026 को जारी किया गया कार्य विभाजन आदेश तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही, स्थापना, लेखा और स्टोर शाखाओं से उन कर्मचारियों को हटाया जाए जिन्हें अयोग्य बताया जा रहा है, और संचालनालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप योग्य कर्मचारियों को प्रभार सौंपा जाए। इसके अतिरिक्त, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है ताकि नियमों की अवहेलना करने वाले संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सके।
इस मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति की पूर्ण स्पष्टता हो सकेगी।
