BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
Business

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट जारी

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने छह महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करते हुए गिरावट जारी रखी।

Few hours ago
2 मिनट में पढ़ें
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट जारी

बाजार में लगातार गिरावट

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में मंगलवार को लगातार गिरावट देखी गई। दोनों सूचकांक पिछले छह महीनों के निम्नतम स्तर के करीब कारोबार कर रहे थे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली के कारण बाजार की धारणा प्रभावित हुई।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

सेंसेक्स ट्रेडिंग सत्र के अंत में 242.65 अंक की गिरावट के साथ 72,529.07 पर बंद हुआ, जो 0.33 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है। वहीं, व्यापक निफ्टी सूचकांक में भी 64.05 अंक या 0.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,716.20 पर बंद हुआ।

बाजार में गिरावट के मुख्य कारण

बाजार में आई इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि है। अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.74 प्रतिशत बढ़कर 107.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। पश्चिम एशिया क्षेत्र की अनिश्चितताओं को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसका वैश्विक वित्तीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर मुद्रास्फीति की उम्मीदों और कंपनियों की उत्पादन लागत को प्रभावित करती है, जिससे निवेशकों की धारणा सतर्क हो जाती है। इस चिंता का असर व्यापक बाजार सूचकांकों पर भी देखा गया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.02 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.95 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई।

क्षेत्रीय कमजोरी

यह गिरावट केवल व्यापक सूचकांकों तक ही सीमित नहीं रही। कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। विशेष रूप से वित्तीय, बैंकिंग और आईटी जैसे क्षेत्र, जिन्हें आमतौर पर अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाता है, में 1 प्रतिशत तक की गिरावट आई। इस व्यापक कमजोरी ने निवेशकों के बीच मौजूदा मंदी के रुझान को स्पष्ट किया।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। विदेशी संस्थाओं द्वारा धन की निकासी अक्सर घरेलू बाजार की तत्काल संभावनाओं में कम आत्मविश्वास का संकेत देती है, जिससे निवेशकों का उत्साह और कम हो जाता है।