कचरा प्रबंधन पर अधिकारियों को प्रशिक्षण, सुप्रीम कोर्ट के नियमों का होगा पालन
भोपाल में आयोजित कार्यशाला में नगरीय अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन करने का प्रशिक्षण दिया गया।

नौगाँव मध्य प्रदेश | संवाददाता: राकेश पाठक
द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 9 अक्टूबर 2026
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा भोपाल में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 और सर्वोच्च न्यायालय के कड़े दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्देश्य कचरा प्रबंधन को लेकर अधिकारियों की समझ और क्षमता को बढ़ाना था, ताकि वे स्थानीय स्तर पर इन नियमों का सख्ती से पालन करवा सकें।
कचरा प्रबंधन नियमों का प्रशिक्षण
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के सभा कक्ष में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के सलाहकार और आईएएस अधिकारी डी. पी. तिवारी ने किया। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने कचरा प्रबंधन की पूरी जवाबदेही अब जिला कलेक्टर को सौंप दी है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो कचरा निपटान की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करेगा। क्षेत्रीय संचालक के. आर. शर्मा ने संस्थान की सौ वर्षों की यात्रा और उसके डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।
नए नियमों के तहत प्रोत्साहन और दंड
दिल्ली से आईं प्रशिक्षक डॉ. केतना मटकर ने प्रतिभागियों को थोक कचरा उत्पादकों को अपने स्तर पर कचरा प्रबंधन के लिए प्रेरित करने की विधि बताई। उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर पंजीकरण कराने और कचरे से बायो-प्लांट लगाने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में कचरे को चार श्रेणियों में अलग करने के महत्व पर जोर दिया गया। डॉ. मटकर ने यह भी स्पष्ट किया कि उपयोगिता शुल्क (कंज्यूमर चार्ज) के माध्यम से इस योजना को आर्थिक रूप से लाभदायक बनाया जा सकता है।
नागरिकों के लिए छूट का प्रावधान
नवीनतम नियमों के अनुसार, जो नागरिक और संस्थान नियमित रूप से अपना कचरा निर्दिष्ट स्थान पर जमा करते हैं, उन्हें 10 प्रतिशत की उपभोक्ता प्रभार छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त, जो लोग होम कंपोस्टिंग या स्थलीय कंपोस्टिंग जैसी विधियों को अपनाते हैं, उन्हें 5 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाएगी, जिससे कुल लाभ 15 प्रतिशत तक हो सकता है। इस प्रकार, नियमों का पालन करने वाले नागरिकों और संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
भविष्य की योजनाएं और प्रमाण पत्र वितरण
कार्यशाला के समापन सत्र में लगभग 50 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। क्षेत्रीय संचालक ने सूचित किया कि आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रम सागर संभाग में आयोजित किया जाएगा। स्वच्छता एंबेसडर डी. डी. तिवारी ने इन नियमों के प्रभावी पालन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह न केवल सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन है, बल्कि एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाने की दिशा में एक आवश्यक कदम भी है। इस प्रशिक्षण से अधिकारियों को कचरा प्रबंधन की नई चुनौतियों का सामना करने और प्रभावी समाधान लागू करने में मदद मिलेगी।
