BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
Regional

इंदौर में 'स्वास्थ्य महाकुंभ' संपन्न, समग्र चिकित्सा के भविष्य पर मंथन

इंदौर में दो दिवसीय 'नेशनल होलिस्टिक हेल्थ कॉन्फ्रेंस' का सफलतापूर्वक समापन हुआ। देशभर के 1200 से अधिक विशेषज्ञों ने योग, प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय चिकित्सा...

Few hours ago
3 मिनट में पढ़ें
•संवाददाता: डॉ. प्रमोद नंदवाल
इंदौर में 'स्वास्थ्य महाकुंभ' संपन्न, समग्र चिकित्सा के भविष्य पर मंथन

Indore | संवाददाता: डॉ. प्रमोद नंदवाल

द क्लिफ न्यूज़ | इंदौर | 1 नवंबर 2026

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दो दिवसीय 'नेशनल होलिस्टिक हेल्थ कॉन्फ्रेंस' (हेल्थकॉन 2026) का समापन एक सफल आयोजन के रूप में हुआ, जिसने समग्र स्वास्थ्य, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के भविष्य पर महत्वपूर्ण मंथन के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। इस राष्ट्रीय आयोजन में देश भर से 1200 से अधिक चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित हुआ।

समग्र स्वास्थ्य और स्वस्थ भारत निर्माण पर जोर

सम्मेलन के दौरान 'स्वस्थ भारत' के निर्माण में योग और प्राकृतिक चिकित्सा की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। दूसरे दिन के सत्रों में, उपस्थित विशेषज्ञों ने इन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रथम सत्र में, डॉ. विवेक माहेश्वरी ने पतंजलि योगसूत्र के मूल सिद्धांतों - तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान - को योग की व्यापक अवधारणा के संदर्भ में सरल भाषा में समझाया। इसके उपरांत, पुणे से आए डॉ. हेमांशु शर्मा ने 'विकसित भारत 2047' के संकल्प में स्वास्थ्य के महत्व को उजागर करते हुए, समग्र स्वास्थ्य में प्राकृतिक चिकित्सा के योगदान को प्रासंगिक आंकड़ों के साथ प्रस्तुत किया।

चिकित्सा पद्धतियों पर सार्थक विमर्श और प्रदर्शन

डॉ. उषा उकांडे के नेतृत्व में आयोजित एक पैनल चर्चा में विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विमर्श हुआ। इस सत्र में डॉ. प्रमिला आर. और डॉ. साधना दौनरिया ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए, जबकि योगिक शुद्धि क्रियाओं के व्यावहारिक प्रदर्शनों ने प्रतिभागियों को भारतीय योग परंपरा के वैज्ञानिक आधार से परिचित कराया। इन सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की गहराई और प्रभावशीलता से अवगत कराना था।

सांस्कृतिक संध्या और मध्य प्रदेश स्थापना दिवस का उत्सव

शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ, सम्मेलन में हास्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसने पूरे माहौल को आनंदमय बनाए रखा। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश स्थापना दिवस को भी एक गौरवपूर्ण वातावरण में मनाया गया, जिसमें प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को समर्पित विशेष प्रस्तुतियां दी गईं। इन सांस्कृतिक आयोजनों ने सम्मेलन में एक उत्सव का रंग भर दिया और प्रतिभागियों को स्थानीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

आयुष पद्धतियों के एकीकरण की दिशा में एक कदम

सम्मेलन के समापन सत्र में, आयोजकों ने आयोजन की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) जैसी सभी प्रमुख आयुष चिकित्सा पद्धतियों को एक ही मंच पर लाकर अनुसंधान और आपसी सहयोग के लिए नए आयाम स्थापित किए। इस एकीकरण का उद्देश्य इन पद्धतियों को एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का एक अभिन्न अंग बनाना था।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा, स्वामी धीरा गौर दास, अश्विनी वर्मा, डॉ. हेमंत शर्मा, डॉ. सुधिरा चंदेल, डॉ. निशा जोशी, अनिल अग्रवाल, डॉ. रीता शर्मा, रौनक सोनी, प्रेम दुआ, शंकर लड्ढा और मनोज वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

भविष्य की दिशा में एक मील का पत्थर

सम्मेलन के मीडिया प्रमुख, डॉ. प्रमोद नंदवाल ने बताया कि इस राष्ट्रीय आयोजन का प्राथमिक लक्ष्य भारतीय चिकित्सा परंपराओं को आधुनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के साथ जोड़ना था। उन्होंने देशभर से मिले उत्साहपूर्ण सहयोग और विशेषज्ञों के ज्ञानवर्धक व्याख्यानों की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मेलन इंदौर के स्वास्थ्य जगत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। यह आयोजन भविष्य में समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा, और विशेषज्ञों की उपस्थिति व शोध प्रस्तुतियों ने इसे एक विशिष्ट पहचान प्रदान की है।

संबंधित समाचार