इंदौर: 26 सितंबर से 8 दिनों तक होगी श्रीमद् भागवत कथा
इंदौर के तिलक नगर में 26 सितंबर से 3 अक्टूबर तक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का आयोजन होगा। काशी के आचार्य डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी...

इंदौर | संवाददाता: आशीष नेमा
द क्लिफ न्यूज़ | इंदौर | 24 सितंबर 2026
पूर्वी इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह आठ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान 26 सितंबर को प्रारंभ होकर 3 अक्टूबर तक चलेगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को मानसिक शांति प्रदान करना और जीवन को सही दिशा की ओर प्रेरित करना है। इस कथा का वाचन काशी के प्रख्यात विद्वान आचार्य डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी महाराज अपनी ओजस्वी वाणी से करेंगे।
आयोजक मंडल के सदस्यों, जिनमें राजेश उदावत और प्रचार प्रमुख शैलेन्द्र महाजन शामिल हैं, ने बताया कि इस कथा का आयोजन जनमानस में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक कथा का पाठ होगा, जिसमें धर्म के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र के निवासियों में विशेष उत्साह का माहौल है।
आठ दिवसीय कथा का विस्तृत कार्यक्रम
कथा के प्रथम दिन, 26 सितंबर को, भागवत महात्म्य और गोकर्ण-मोक्ष की कथा के साथ परंपराओं का वर्णन किया जाएगा। दूसरे दिन राजा परीक्षित और शुकदेव संवाद के माध्यम से ज्ञान चर्चा होगी, जो आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगी। तीसरे दिन प्रहलाद की भक्ति और भगवान श्रीराम के अवतार की कथा सुनाई जाएगी, जो भक्त और भगवान के अटूट संबंधों को रेखांकित करेगी।
कथा का चौथा दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर नंद उत्सव का आयोजन भी होगा और श्रद्धालुओं के बीच माखन-मिश्री का प्रसाद वितरण किया जाएगा। यह दिन आनंद और उल्लास का प्रतीक होगा, जो सभी को भक्ति के रंग में रंग देगा।
लीलाओं और चरित्रों का वर्णन
आचार्य डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी महाराज पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन लीला का विस्तृत वर्णन करेंगे। छठे दिन कंस वध और मनमोहक रास लीला के प्रसंग भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगे, जो मन को मंत्रमुग्ध कर देंगे। सातवें दिन द्वारका लीला और माता रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनाया जाएगा, जो अलौकिक प्रेम का प्रतीक है।
कथा के आठवें और अंतिम दिन, सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन होगा, जो मित्रता और समर्पण की मिसाल पेश करेगा। इसके साथ ही श्रीमद् गीता प्रवचन, पूर्णाहुति और आचार्य शुकदेव की विदाई के साथ इस मंगलकारी कार्यक्रम का समापन किया जाएगा। यह विभिन्न कथाएं और प्रसंग श्रोताओं को एक आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाएंगे।
आध्यात्मिक उन्नति का अवसर
आयोजन समिति के सदस्य राजेश उदावत ने इस आयोजन को शहर के लिए सौभाग्य का विषय बताया है, विशेषकर काशी जैसे पवित्र धाम से आचार्य का आगमन। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं, माताओं और बहनों से सपरिवार इस ज्ञान यज्ञ में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है। तिलक नगर क्षेत्र में कथा स्थल पर व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। समिति को विश्वास है कि यह धार्मिक अनुष्ठान समाज में सौहार्द और भक्ति की एक नई लहर उत्पन्न करेगा, और धर्म प्रेमियों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का एक सशक्त माध्यम सिद्ध होगा।
