गुना वृद्धाश्रम में गायत्री परिवार ने किया पितरों के लिए तर्पण अनुष्ठान
गुना वृद्धाश्रम में सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ ने 17 वर्षों से जारी परंपरा के तहत सामूहिक तर्पण और पिंडदान का आयोजन...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 11 अक्टूबर 2026
गुना शहर के वृद्धा आश्रम में सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ द्वारा पितरों की आत्म-शांति के लिए सामूहिक तर्पण और पिंडदान का एक विशेष आयोजन किया गया। संस्था पिछले सत्रह वर्षों से लगातार इस सेवा कार्य को पूरी निष्ठा के साथ संचालित कर रही है। इस वर्ष भी इस अनुष्ठान के तहत आश्रम में रहने वाले 32 वृद्धजनों ने अपने पूर्वजों की शांति के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से संस्कार संपन्न किए।
कार्यक्रम का प्रारंभ गायत्री परिवार के युवा सदस्यों द्वारा वृद्धा आश्रम में निवास कर रही सभी माताओं और बुजुर्ग भाइयों के तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत के साथ हुआ। इस धार्मिक और सेवाभावी आयोजन में कुल 32 परिजनों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जिनमें छह महिला वृद्ध माताएं और छब्बीस पुरुष वृद्धजन शामिल रहे। आश्रम के रहवासी वृद्धजनों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्ण श्रद्धा से तर्पण और पिंडदान संस्कार संपन्न किए।
सत्रह वर्षों से अनवरत जारी है यह परंपरा
गायत्री परिवार के जिला समन्वयक सुरेन्द्र प्रजापति और युवा प्रकोष्ठ के जिला समन्वयक सुनील सेन ने बताया कि यह संस्था प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सर्वपितृ अमावस्या के अंतिम दिन सामूहिक तर्पण का अनुष्ठान करा रही है। यह परंपरा पिछले सत्रह वर्षों से लगातार जारी है। इस अनुष्ठान में आश्रम के वृद्धजनों को अपने पितरों का स्मरण कर उन्हें शांति प्रदान करने का अवसर मिलता है।
सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने का प्रयास
इस विशेष अवसर पर गायत्री परिवार के गुमान सिंह कुशवाह, राम शर्मा, रवि कुमार कुशवाह, राहुल सेन, जीतेन्द्र शर्मा, श्याम श्रीवास्तव, रामनाथ महेरा, वीरेंद्र गोस्वामी, प्रखर प्रजापति, निखिल गोस्वामी और श्रेष्ठ सेन सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने विधि-विधान से अपने पितरों का तर्पण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। संस्था का यह अनूठा प्रयास न केवल बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करता है, बल्कि भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपराओं को भी जीवंत रखने की दिशा में एक सार्थक कदम है। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।
