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गुना रामलीला: राम ने तोड़ा शिव धनुष, लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने मोहा

गुना की पुरानी गल्ला मंडी में रामलीला के चौथे दिन सीता स्वयंवर का सजीव मंचन हुआ, जिसमें भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ा। लक्ष्मण और...

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•संवाददाता: राजा हतम वेग
गुना रामलीला: राम ने तोड़ा शिव धनुष, लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने मोहा

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 11 अक्टूबर 2026

गुना की पुरानी गल्ला मंडी में सार्वजनिक श्री रामलीला एवं दशहरा पर्व समिति द्वारा आयोजित रामलीला का मंचन अपने चौथे दिन भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस अवसर पर कलाकारों ने अत्यंत सजीवता के साथ सीता स्वयंवर और लक्ष्मण-परशुराम संवाद की लीला का मंचन किया, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मिथिला के राजा जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर के दृश्यों से हुई, जहाँ उन्होंने घोषणा की कि जो भी वीर पुरुष शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ देवी सीता का विवाह संपन्न होगा। इस प्रतिज्ञा के फलस्वरूप लंकापति रावण, बाणासुर सहित अनेक पराक्रमी राजाओं ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने का प्रयास किया। परंतु, सभी राजा उस विशाल शिव धनुष को हिला तक नहीं सके, जिससे सभा में निराशा और सन्नाटा छा गया।

अहंकारी राजाओं की विफलता और जनक का खेद

जब कोई भी राजा शिव धनुष को उठाने में सफल नहीं हुआ, तो मिथिला नरेश जनक अत्यंत व्यथित हुए। उन्होंने हताशा में यह वाक्य कहा कि यह पृथ्वी अब वीरों से विहीन हो गई है। जनक के इस कथन से सभा में उपस्थित लोगों में बेचैनी फैल गई, क्योंकि स्वयंवर का उद्देश्य ही वीर पुरुष का चयन करना था। इस घोषणा से न केवल जनक बल्कि वहां उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्ति चिंतित हो उठे।

पिता के अपमानजनक शब्दों को सुनकर भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण क्रोधित हो उठे। उन्होंने अत्यंत आवेश में कहा कि जिस सभा में रघुवंश का एक भी योग्य व्यक्ति उपस्थित हो, वहाँ ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं। लक्ष्मण के शब्दों में स्पष्ट रूप से अपनी श्रेष्ठता का भाव झलक रहा था, उन्होंने कहा कि वे स्वयं ऐसी सभा को ही समाप्त कर सकते हैं। लक्ष्मण ने यहाँ तक कह दिया कि यदि गुरु विश्वामित्र की आज्ञा मिले, तो वे पूरे ब्रह्मांड को किसी कच्चे घड़े की भांति आसानी से फोड़ सकते हैं। उनके इस उग्र स्वभाव को देखकर भगवान श्रीराम ने स्नेहपूर्वक उन्हें शांत कराया, जो उनकी भ्रातृ-प्रेम और संयम का परिचायक था।

राम द्वारा शिव धनुष का भंग और जयकारों का शोर

इसके पश्चात, गुरु विश्वामित्र के निर्देश पर, भगवान श्रीराम ने आगे बढ़कर उस विशाल शिव धनुष को उठाया। धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह प्रचंड ध्वनि के साथ टूट गया। धनुष के भंग होने की गगनभेदी ध्वनि से पूरा पंडाल गूंज उठा और उपस्थित दर्शकों ने 'जय श्रीराम' के नारों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। यह क्षण न केवल स्वयंवर की सफलता का प्रतीक था, बल्कि राम की शक्ति और दिव्यता का भी प्रमाण था।

लक्ष्मण-परशुराम संवाद और विवाद का चरमोत्कर्ष

शिव धनुष के टूटने की भयानक ध्वनि सुनकर भगवान शिव के परम भक्त परशुराम अत्यंत क्रोधित अवस्था में जनक दरबार में पहुंचे। उन्होंने आवेश में आकर कहा कि जिसने भी शिव के धनुष को तोड़ा है, वह उनका शत्रु है और उसे इसका परिणाम भुगतना होगा। उनकी गर्जना से पूरा दरबार कांप उठा। इस पर भगवान श्रीराम ने अत्यंत विनम्र भाव से उत्तर दिया कि धनुष तोड़ने वाला निश्चित रूप से आपका ही कोई दास होगा, जिसने आपकी आज्ञा का पालन किया है।

परशुराम ने उत्तर दिया कि दास वह होता है जो सेवा का कार्य करे, न कि धरोहर को नष्ट करे। इस पर लक्ष्मण ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि उन्होंने बचपन में ऐसे कई धनुष तोड़े थे, तब तो किसी ने इतना क्रोध नहीं किया था। उन्होंने परशुराम के इस विशेष क्रोध पर प्रश्न उठाया। लक्ष्मण के तीखे शब्दों ने परशुराम के क्रोध को और भड़का दिया, जिससे एक तीखी तकरार की स्थिति उत्पन्न हो गई।

समाधान और परशुराम का प्रस्थान

हालांकि, अंततः भगवान श्रीराम के शांत और दिव्य स्वरूप को पहचानकर, परशुराम का क्रोध शांत हुआ। राम ने अपनी विनम्रता और वाक्पटुता से परशुराम को समझाया कि शिव का धनुष उनका कोई शत्रु नहीं, बल्कि एक भक्त ही था जिसने इस कार्य को संपन्न किया। उन्होंने परशुराम को उनके अपने ही शब्दों का स्मरण कराया। उन्होंने राम की विनम्रता और प्रताप को स्वीकार किया और क्षमा मांगी। तत्पश्चात, वे अपनी तपस्या करने के लिए पुनः प्रस्थान कर गए। इस प्रकार, राम ने न केवल स्वयंवर में विजय प्राप्त की, बल्कि अपने अद्भुत संयम और विनम्रता से उग्र विवाद को भी कुशलता से सुलझा लिया।

इस कार्यक्रम का आयोजन समिति के संयोजक गोविंद सोनी, अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष रामदयाल कुशवाह, सचिव विजय पटेरिया और कोषाध्यक्ष अतिवीर जैन के अथक प्रयासों से सफल रहा। मंचन को सफल बनाने में निर्देशक पुरुषोत्तम धाकड़, मीडिया प्रभारी योगेश लोधा, अनिल जैन, डॉ. अनिल जैन, प्रमोद अग्रवाल, ब्रजेश राठौर, दीपक सोनी और दामोदर शर्मा ने विशेष सहयोग दिया। कलाकारों में महावीर जैन, हरवीर धाकड़, जमना लाल कुशवाह, रघुवीर ओझा, वैभव भार्गव, रुद्र भार्गव, रमेश जैन और घनश्याम रघुवंशी ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। व्यास गद्दी पर शंभू दयाल शर्मा और ढोलक पर सुनील शर्मा ने मधुर संगीत का साथ दिया। समिति के अनुसार, आगामी लीलाओं में राम विवाह का सुंदर मंचन किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए एक और आकर्षक प्रस्तुति होगी, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है।

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