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गुना में सांकेतिक भाषा दिवस: दिव्यांग बच्चों ने प्रतिभा से जगाई उम्मीद

गुना के सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास में सांकेतिक भाषा दिवस पर कार्यक्रम हुआ। दिव्यांग बच्चों ने सांकेतिक भाषा में अपनी प्रतिभा दिखाई, जिससे संवाद और आत्मविश्वास बढ़ा।

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•संवाददाता: राजा हतम वेग
गुना में सांकेतिक भाषा दिवस: दिव्यांग बच्चों ने प्रतिभा से जगाई उम्मीद

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 24 सितंबर 2026

गुना के नानाखेड़ी स्थित सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास में अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बधिर और श्रवणबाधित दिव्यांगजनों के जीवन में सांकेतिक भाषा के महत्व को उजागर करना और समाज में संवेदनशीलता व समावेशिता को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर उपसंचालक रिशु कुमार सुमन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

कार्यक्रम में सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास के श्रवणबाधित बच्चों के साथ-साथ सोनाली पब्लिक एवं शिक्षा समिति के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों के संवाद कौशल और रचनात्मकता को मंच प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें उन्होंने सांकेतिक भाषा का उपयोग करते हुए अपने विचारों और भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया। अभिषेक पाटनी, रविन्द्र यादव और जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के कर्मचारियों ने बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उनका हौसला बढ़ाया।

सांकेतिक भाषा: संवाद से बढ़कर, आत्मविश्वास का माध्यम

विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सांकेतिक भाषा केवल संप्रेषण का एक साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह दिव्यांगजनों को आत्मविश्वास, सम्मान और समाज में समान अवसर प्रदान करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे दिव्यांगजनों के प्रति समानता और सहयोग की भावना रखें, ताकि उन्हें मुख्यधारा में पूर्ण गरिमा के साथ एकीकृत किया जा सके।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के विशाल सैनी, रिंकी तोमर, आकाश जैन, सोनम चंदेल के साथ-साथ अशासकीय संस्था के सदस्य और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस आयोजन ने न केवल दिव्यांग बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का काम किया, बल्कि समाज में सांकेतिक भाषा के प्रति एक नई और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और प्रोत्साहन स्वरूप सराहना भी प्रदान की गई।