दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के पास बायोफ्यूल पंप बिना NOC के सील
मंदसौर के गरोठ में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के पास संचालित हो रहे श्री कृष्ण बायोफ्यूल डीजल पंप को कलेक्टर से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न होने के कारण प्रशासन ने सील कर दिया है।

संवाददाता: राजकुमार कोटवार
द क्लिफ न्यूज़ | मंदसौर | 29 सितंबर 2026
मंदसौर जिले के गरोठ क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के समीप स्थित श्री कृष्ण बायोफ्यूल डीजल पंप को प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। पंप के संचालन के लिए आवश्यक कलेक्टर की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त न होने के चलते यह कार्रवाई की गई है। इस घटनाक्रम के बाद से क्षेत्र में सवाल उठ रहे हैं कि करीब एक साल से अधिक समय से संचालित हो रहे इस प्रतिष्ठान की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह बायोफ्यूल पंप मार्च 2025 से लगातार संचालित हो रहा था। यह पंप गरोठ के एसडीएम राहुल चौहान के कार्यक्षेत्र में आता है। मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण प्रशासनिक और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों का इस मार्ग से नियमित आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पंप के संचालन के लिए कलेक्टर की NOC अनिवार्य थी और अब जांच में इसके अभाव में पंप सील किया गया है, तो मार्च 2025 से अब तक संबंधित विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं पड़ी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि संचालन के दौरान कभी पंप के निरीक्षण या दस्तावेजों की जांच की गई थी या नहीं।
अधिकारी टीम ने की कार्रवाई, पंप सील
मंगलवार की सुबह, गरोठ के एसडीएम राहुल चौहान के नेतृत्व में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और खाद्य विभाग की एक संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत, प्रतिष्ठान के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया और संबंधित बायोफ्यूल पंप को सील करने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई ने अनियमित संचालन पर अंकुश लगाने की दिशा में कदम उठाया है।
निगरानी व्यवस्था पर उठते सवाल
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि संबंधित अधिकारी इस बात का स्पष्टीकरण दें कि एक वर्ष से अधिक समय से संचालित हो रहे इस प्रतिष्ठान की अनुमति और दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की गई। नियमित निरीक्षण और संबंधित नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्या थी, इस पर भी प्रशासन को जवाब देना होगा। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, जिससे उनका आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका है।
