दमोह में स्वामित्व योजना का प्रचार, ग्रामीणों को घर बैठे मिलेगा मालिकाना हक
दमोह जिले में कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व अधिकारियों ने घर-घर जाकर स्वामित्व योजना के लाभ समझाए। अब ग्रामीण एमपी ई-सेवा ऐप से कर सकेंगे...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: अनिल राठौर
द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 8 अक्टूबर 2026
दमोह जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 'स्वामित्व योजना' के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया गया है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देशन में, तहसीलदार आशुतोष गुप्ता और नायब तहसीलदार अटल वर्मा ने ग्रामीणों तक पहुंचकर उन्हें इस महत्वपूर्ण योजना के उद्देश्यों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाली भूमि का व्यवस्थित सर्वे करके पात्र परिवारों को उनकी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक प्रदान करना है।
स्वामित्व योजना के तहत, ग्रामीणों को अपनी भूमि के स्वामित्व का पुख्ता प्रमाण पत्र, जिसे 'संपत्ति कार्ड' कहा जाता है, प्राप्त होगा। यह कार्ड न केवल भूमि पर उनके वैध अधिकार को स्थापित करेगा, बल्कि भविष्य में बैंक से ऋण प्राप्त करने या संपत्ति से जुड़े विवादों को सुलझाने में भी बेहद मददगार साबित होगा। ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार किए गए ये अभिलेख ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
संपत्ति कार्ड से मिलेगा ऋण और विवादों का समाधान
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि संपत्ति कार्ड ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। इसके माध्यम से वे अपनी संपत्ति को गिरवी रखकर आसानी से बैंक से ऋण प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, स्पष्ट मालिकाना हक होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण समुदायों में सौहार्द बना रहेगा।
ई-सेवा ऐप से आवेदन, घर बैठे पाएं मालिकाना हक
योजना का लाभ सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए, अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपनी केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की अपील की है। अब पात्र हितग्राही अपनी रजिस्ट्री संबंधी आवेदन प्रक्रिया को 'एमपी ई-सेवा ऐप' के माध्यम से घर बैठे ही पूरी कर सकते हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों को इस डिजिटल ऐप का उपयोग करने की चरणबद्ध प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया, ताकि वे आसानी से इसका लाभ उठा सकें। इस पहल का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र ग्रामीण सरकारी सुविधा से वंचित न रहे और ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति का रिकॉर्ड पूरी तरह से पारदर्शी और व्यवस्थित हो सके।
