भीम आर्मी ने आरक्षण व न्यायिक सुधारों की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
गुना में भीम आर्मी ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर एससी, एसटी, ओबीसी के संवैधानिक अधिकारों की बहाली, महिलाओं के लिए आरक्षण, और न्यायिक कॉलेजियम व्यवस्था...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 24 सितंबर 2026
भीम आर्मी भारत एकता मिशन की जिला इकाई ने गुरुवार को जिला मुख्यालय गुना में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक विशाल रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन के माध्यम से यह ज्ञापन सौंपा, जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की बहाली और सशक्तिकरण से संबंधित कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
ज्ञापन में भीम आर्मी ने विशेष रूप से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर महत्वपूर्ण मांगें रखीं। संगठन का कहना है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए मौजूदा कोटे के भीतर ही 50 प्रतिशत आरक्षण अलग से सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त, कन्नौज, आंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर में स्थित उन मेडिकल कॉलेजों में एससी/एसटी वर्ग के लिए पूर्व में लागू 70 प्रतिशत आरक्षण को बहाल करने पर जोर दिया गया, जिनका निर्माण स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के तहत किया गया था।
न्यायिक नियुक्ति प्रणाली में सुधार की मांग
संगठन ने न्यायपालिका में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रचलित कॉलेजियम व्यवस्था को समाप्त करने की पुरजोर मांग की है। इसके स्थान पर एक पारदर्शी और जवाबदेह उच्च न्यायिक आयोग गठित करने का प्रस्ताव दिया गया है। भीम आर्मी का मानना है कि यह कदम न्यायपालिका में नियुक्तियों को अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाएगा।
जातिगत जनगणना और पदोन्नति में आरक्षण
ज्ञापन में आगामी जातिगत जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए एक अलग कॉलम शामिल करने की मांग की गई है, ताकि उनकी सटीक जनसंख्या का पता चल सके और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। साथ ही, संगठन ने पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था को पुनः लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। यह मांग सरकारी सेवाओं में एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।
एट्रोसिटी एक्ट में मुआवजे की मांग और आंदोलन की चेतावनी
भीम आर्मी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत पीड़ितों की मुआवजा राशि को बढ़ाकर 30 लाख रुपये करने की भी मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन महत्वपूर्ण मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन पूरे देश में व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
