बरेली पुलिस सीखेगी सांकेतिक भाषा, मूक-बधिरों से संवाद आसान होगा
बरेली पुलिस लाइन में अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर आयोजित कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को मूक-बधिरों से संवाद का प्रशिक्षण दिया गया।

बरेली उत्तर प्रदेश | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 23 सितंबर 2026
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य में बरेली पुलिस लाइन में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को मूक-बधिर एवं दिव्यांगजनों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित करने के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण देना है। पुलिस अधीक्षक दक्षिणी एवं लाइंस अंशिका वर्मा के पर्यवेक्षण में आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में पुलिस बल की संवाद क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
इस कार्यशाला के दौरान, अखिल उत्तर प्रदेश बधिर संस्था की बरेली शाखा के विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा के मूलभूत सिद्धांत सिखाए। उन्होंने व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से यह सिखाया कि किस प्रकार मूक-बधिर व्यक्तियों की बात को समझा जा सके और उन्हें अपनी बात प्रभावी ढंग से बताई जा सके। यह पहल विशेष रूप से उन मूक-बधिर नागरिकों के लिए सहायक होगी जो पुलिस थानों में सहायता या जानकारी के लिए आते हैं।
दिव्यांगजनों से संवाद की सुगमता पर जोर
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी चमन सिंह ने इस अवसर पर उपस्थित पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए दिव्यांगजनों से संवाद को सुगम बनाने हेतु विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दिव्यांगजनों से संबंधित विभिन्न भाषाओं, उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं और इन वर्गों के प्रति संवेदनशील होने के महत्व पर प्रकाश डाला। सिंह ने बताया कि कैसे पुलिसकर्मी अपनी संवाद शैली में सुधार कर इन नागरिकों की बेहतर सहायता कर सकते हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता और सुगमता लाई जा सके।
पुलिसकर्मियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला में सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी लाइंस शिवम आशुतोष सिंह, बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के पदाधिकारी, तथा जनपद के विभिन्न थानों और शाखाओं से आए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण सत्र में सक्रियता से हिस्सा लिया और सांकेतिक भाषा सीखने में रुचि दिखाई। प्रतिसार निरीक्षक हरमीत सिंह ने कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। इस प्रशिक्षण का दीर्घकालिक लक्ष्य पुलिस थानों पर आने वाले मूक-बधिर नागरिकों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी सहायता प्रदान करना है, जिसे दिव्यांग सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
