बरेली: फर्जी डॉक्टर बनकर नकली दवाएं बेचने वाले दो गिरफ्तार
बरेली के इज्जतनगर में पुलिस ने नकली दवाएं बेच रहे एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। राजीव एन्क्लेव स्थित फर्जी कॉल सेंटर से समीरउद्दीन और...

बरेली उत्तर प्रदेश | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 6 अक्टूबर 2026
बरेली के इज्जतनगर थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो खुद को डॉक्टर बताकर ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को नकली दवाएं बेच रहा था। पुलिस ने राजीव एन्क्लेव कॉलोनी स्थित एक मकान में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर दो आरोपियों, समीरउद्दीन और यूसुफ को गिरफ्तार किया है। इस मामले में गिरोह का एक सदस्य इलियास खान मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी 'हबगल हैंड जड़ी-बूटी' के नाम से इंस्टाग्राम पर भ्रामक विज्ञापन चलाते थे। वे बाजार से कच्चा माल खरीदकर उसे खाली कैप्सूल में भरते थे, फिर उन पर फर्जी रैपर लगाकर ऑनलाइन बेचते थे। पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे सहारनपुर और मुरादाबाद से कच्चा माल मंगवाते थे और देवरनियां कस्बे में भी उनकी एक दुकान थी। गौरतलब है कि उनके पास इस तरह की दवाओं के व्यापार के लिए कोई वैध लाइसेंस नहीं था और वे पिछले लगभग एक साल से इस अवैध कारोबार में संलिप्त थे।
भारी मात्रा में नकली दवाएं और उपकरण बरामद
थाना इज्जतनगर पुलिस ने छापेमारी के दौरान मौके से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। बरामद सामानों में 12 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, छह कंप्यूटर, तीन प्रिंटर, आठ मॉनीटर, एक स्कैनर, की-बोर्ड और माउस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने छह विभिन्न बैंकों की चेकबुक, 14 एटीएम कार्ड, करीब एक लाख नब्बे हजार नौ सौ रुपये नकद, 85 पैकेट नकली दवाएं और कूटरचित लाइसेंस भी बरामद किए हैं।
पुलिस ने इस मामले में मु0अ0सं0 0952/2026 के तहत भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार किए गए समीरउद्दीन और यूसुफ को नियमानुसार न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया गया है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सुरेश चन्द्र गौतम और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस गिरोह के फरार सदस्य इलियास खान की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, साथ ही अन्य संभावित ठिकानों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि आरोपी अपनी कमाई को आपस में बराबर बांटते थे।
