बरेली में किसानों की आय बढ़ाने को मोती संवर्धन योजना शुरू
बरेली जिले के मत्स्य विभाग ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मोती संवर्धन परियोजना का ट्रायल शुरू किया है। फरीदपुर तहसील के किसान...

अफसार खान संवाददाता बरेली | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 24 सितंबर 2026
बरेली जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग ने एक नई पहल की शुरुआत की है। जिले में पहली बार तालाबों में मोती तैयार करने की योजना का ट्रायल शुरू किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत फरीदपुर तहसील के निवासी रोहितास गंगवार का चयन किया गया है। उनके चार सौ चालीस वर्ग मीटर के तालाब में दो हजार सीपों का पालन किया जाएगा, जिससे किसानों के लिए आय का एक नया और प्रभावी साधन साबित हो सकता है।
इस योजना की कुल लागत डेढ़ लाख रुपये निर्धारित की गई है। मत्स्य विभाग की ओर से लाभार्थी को साठ हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जो कुल लागत का चालीस प्रतिशत हिस्सा है। सहायक निदेशक मत्स्य, बरेली गायत्री पाण्डे ने बताया कि मोती पालन की प्रक्रिया में सीप का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए आठ से दस सेंटीमीटर आकार के स्वस्थ और रोगमुक्त सीपों का चुनाव किया जाता है। बीज सरकारी या निजी प्रक्षेत्रों से प्राप्त किए जा सकते हैं।
सीप पालन: प्रक्रिया और अवधि
सीप पालन की विधि में प्राथमिक पालन, नाभिक प्रवेश और मुख्य पालन के चरण शामिल हैं। प्राथमिक पालन के दौरान सीपों को साफ पानी में रखा जाता है। इसके पश्चात बीस गुणा दस फीट के तालाब में, जिसकी गहराई पांच से छह फीट हो, इन्हें जाल में लटकाकर रखा जाता है। इसमें लगभग एक हजार सीप रखे जा सकते हैं। नाभिक प्रवेश प्रक्रिया में कैंची या फोर्क की मदद से दो मिलीमीटर का न्यूक्लियस सीप के भीतर डाला जाता है।
मोती तैयार होने की अवधि उसके आकार पर निर्भर करती है। गोल आकार के मोती के लिए लगभग दो वर्ष का समय लगता है, जबकि अन्य आकार के लिए छह माह से एक वर्ष तक की आवश्यकता होती है। मुख्य पालन के दौरान सीप प्राकृतिक आहार जैसे शैवाल, डायटम और गोबर खाद का उपयोग करते हैं। दो से तीन वर्ष पूर्ण होने पर सीप को बाहर निकालकर मोती इकट्ठा किया जाता है। सही तरीके से पालन करने पर किसान बाजार में मोती बेचकर काफी लाभ कमा सकते हैं।
