बलरामपुर में थारू छात्राओं को मिलीं 299 साइकिलें, शिक्षा की राह हुई आसान
बलरामपुर में थारू जनजाति की 299 बालिकाओं को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए साइकिलें वितरित की गईं। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने किया...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 9 अक्टूबर 2026
बलरामपुर जिले में थारू जनजाति की बालिकाओं को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने और उनके विद्यालय आने-जाने की सुविधा को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विकास खंड पचपेड़वा के इमलिया कोडर स्थित थारू जनजाति संग्रहालय में आयोजित इस पहल के तहत कुल 299 छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं।
इस साइकिल वितरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में महंत देवीपाटन मंदिर मिथलेश नाथ योगी, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन एवं पुलिस अधीक्षक मार्तण्ड प्रकाश सिंह शामिल थे। अतिथियों ने छात्राओं को साइकिलें सौंपने के साथ-साथ उन्हें नियमित रूप से विद्यालय जाने, लगन से पढ़ाई करने और अपने जीवन में निरंतर प्रगति करने के लिए प्रेरित किया। प्रशासन का एक प्रमुख लक्ष्य दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली छात्राओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे भी बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें।
दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को मिलेगी आवागमन में सुविधा
इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन छात्राओं को विद्यालय तक पहुंचने में होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों से निजात दिलाना है, जो दूरदराज के इलाकों में निवास करती हैं। साइकिलें मिलने से अब उनका विद्यालय आना-जाना न केवल अधिक सुविधाजनक होगा, बल्कि उनके कीमती समय की भी बचत होगी। यह व्यवस्था विद्यालयों में छात्राओं की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। थारू जनजाति के शैक्षिक और सामाजिक उत्थान की दिशा में इसे एक सार्थक कदम माना जा रहा है।
आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को बढ़ावा
जनपद के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में निवास करने वाले थारू जनजातीय परिवारों की बालिकाओं के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित होने की उम्मीद है। साइकिलें प्राप्त करने वाली छात्राओं में अपार उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिली। यह पहल उनकी शैक्षिक यात्रा को सुगम बनाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर थारू जनजाति विकास विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे। यह प्रयास भविष्य में थारू समाज की बेटियों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
