बलरामपुर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर जिलाधिकारी का जोर
बलरामपुर में जिलाधिकारी ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और शत-प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य की प्राप्ति पर बल दिया। प्रभावी माइक्रोप्लानिंग और छूटे...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 24 सितंबर 2026
बलरामपुर जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने तथा नियमित टीकाकरण के शत-प्रतिशत लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। होटल आदित्य इन में संपन्न हुई इस एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने की, जिसमें जिले के चिकित्साधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने स्पष्ट किया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक पात्र बच्चे और गर्भवती महिला तक टीकाकरण सेवाओं की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग का सर्वोपरि दायित्व है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को यह निर्देश दिया कि कोई भी पात्र लाभार्थी टीकाकरण से वंचित न रहे, इसके लिए एक प्रभावी रणनीति के साथ धरातल पर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए टीकाकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नियमित टीकाकरण के लिए प्रभावी माइक्रोप्लानिंग पर जोर
जिलाधिकारी ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की माइक्रोप्लानिंग पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत और स्वास्थ्य उपकेंद्र स्तर पर लाभार्थियों की अद्यतन सूची तैयार की जानी चाहिए। ड्यू लिस्ट के आधार पर टीकाकरण सत्रों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चिकित्साधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि टीकाकरण से छूटे हुए और आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें तत्काल कवर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि माइक्रोप्लान में उन संवेदनशील समुदायों और भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्रों को विशेष रूप से शामिल किया जाना चाहिए जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सामान्यतः कम होती है। यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी बच्चा टीकाकरण के दायरे से बाहर न रहे।
जिलाधिकारी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि माइक्रोप्लान बनाते समय वर्तमान डेटा का गहन विश्लेषण किया जाए। उन कारणों का पता लगाया जाना चाहिए जिनके चलते बच्चे टीकाकरण से छूट जाते हैं, जैसे कि जागरूकता की कमी, सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएं, या स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपलब्धता। इन कारणों के निवारण के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सत्र की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए ताकि उसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके और आवश्यकतानुसार सुधार किए जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग को छूटे हुए बच्चों और गर्भवती महिलाओं की पहचान पर निर्देश
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को विशेष रूप से निर्देश दिया कि वे छूटे हुए बच्चों और गर्भवती महिलाओं की पहचान के लिए एक सघन अभियान चलाएं। इसके लिए आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एक विस्तृत सर्वेक्षण किया जाना चाहिए। इस सर्वेक्षण के माध्यम से उन सभी लाभार्थियों की सूची तैयार की जाएगी जो किसी कारणवश नियमित टीकाकरण या आवश्यक स्वास्थ्य जांच से वंचित रह गए हैं। इन लाभार्थियों की पहचान के बाद, उन्हें जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का पूर्ण टीकाकरण उसके जीवन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, और गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण मातृत्व मृत्यु दर को कम करने में सहायक होता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस पहचान अभियान के दौरान, स्वास्थ्य कर्मियों को लाभार्थियों के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए और टीकाकरण तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व के बारे में उन्हें विस्तार से जानकारी देनी चाहिए। यदि लाभार्थियों को कोई संदेह या चिंता है, तो उसका समाधान किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी लाभार्थी छूट न जाए, ब्लॉक और जिला स्तर पर एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जा सकता है जो इस अभियान की प्रगति की निगरानी करेगा।
ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस सत्रों को अधिक परिणामोन्मुखी बनाने पर चर्चा
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण आधार माने जाने वाले ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) सत्रों को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि इन सत्रों का उद्देश्य केवल बच्चों का टीकाकरण ही नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच और पोषण संबंधी परामर्श भी उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को टीकाकरण के महत्व के बारे में लाभार्थियों को समय पर सूचित करना चाहिए, जिससे सत्रों में उनकी उपस्थिति बढ़ाई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि वीएचएसएनडी सत्रों को अधिक व्यापक और हितकारी बनाने के लिए उनमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इन सत्रों में पोषण संबंधी जागरूकता, बाल विकास, स्वच्छता और संक्रामक रोगों की रोकथाम जैसे विषयों पर भी जानकारी दी जानी चाहिए। गर्भवती महिलाओं के लिए आयरन और कैल्शियम की गोलियों का वितरण, बच्चों के लिए विटामिन ए की खुराक और डीवर्मिंग दवाएं प्रदान की जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन सत्रों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये दोनों कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन दोनों समूहों के बीच प्रभावी तालमेल से टीकाकरण कवरेज को बढ़ाया जा सकता है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य सेवाओं को भी सुदृढ़ किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि उन्हें एक टीम के रूप में कार्य करना चाहिए, एक-दूसरे के कार्यों का समर्थन करना चाहिए और लाभार्थियों को आवश्यक जानकारी व सहायता प्रदान करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को नियमित टीकाकरण सत्रों के बारे में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के अभिभावकों को समय पर जानकारी देनी चाहिए, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समुदाय में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने में मदद कर सकती हैं। दोनों को मिलकर छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना चाहिए। इन कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन बेहतर ढंग से कर सकें।
तकनीकी पहलुओं और सामुदायिक सहभागिता पर विस्तृत मंथन
तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के दौरान टीकाकरण कवरेज बढ़ाने की विभिन्न रणनीतियों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के तरीकों पर विस्तृत मंथन किया गया। जिलाधिकारी ने सभी चिकित्साधिकारियों को कार्यशाला में प्राप्त निर्देशों और तैयार किए गए माइक्रोप्लान को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में टीकाकरण की प्रगति संतोषजनक नहीं है, वहां विशेष प्रयासों की आवश्यकता है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश रस्तोगी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। प्रशासन का यह कदम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसमें स्थानीय नेताओं, गैर-सरकारी संगठनों और समुदाय-आधारित समूहों को टीकाकरण अभियानों में शामिल करना शामिल है। सामाजिक बहिष्कार, गलत सूचनाओं और अन्य बाधाओं को दूर करने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि समुदाय की सक्रिय भागीदारी से ही शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
