बालाघाट लूटकांड का खुलासा: अंतर्राज्यीय 'ऐरागोल्ला गैंग' के 3 सदस्य गिरफ्तार, 22 लाख के जेवर जब्त
मध्यप्रदेश पुलिस ने बालाघाट में सर्राफा व्यापारियों से हुई दो लूट की वारदातों का खुलासा करते हुए अंतर्राज्यीय 'ऐरागोल्ला गैंग' के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से लगभग 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण बरामद हुए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 8 अक्टूबर 2026
मध्यप्रदेश पुलिस ने अपनी तकनीकी दक्षता और सघन मैदानी कार्रवाई का एक बार फिर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बालाघाट जिले में हुई सर्राफा व्यापारियों से लूट की दो बड़ी वारदातों का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने अंतर्राज्यीय 'ऐरागोल्ला गैंग' के तीन सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपियों के कब्जे से दोनों घटनाओं में लूटे गए लगभग 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए गए हैं। यह खुलासा मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गंभीर एवं संगठित अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे सघन अभियानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें तकनीकी साक्ष्यों, मैदानी सूचना तंत्र और अंतर्राज्यीय समन्वय का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया है।
आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने और डिजिटल निशान से बचने के लिए काफी सुनियोजित तरीके से काम किया था। इसके बावजूद, पुलिस की टीमों ने सीसीटीवी फुटेज, टेलीफोन रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्यों, मैदानी सूचना तंत्र के साथ-साथ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्रप्रदेश तक लगातार सघन तलाश कर इन अपराधियों तक पहुँचने में कामयाबी पाई।
65 दिनों तक चला व्यापक अंतर्राज्यीय अभियान
बालाघाट पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित विशेष टीमों ने 5 अगस्त 2026 से 8 अक्टूबर 2026 तक, कुल 65 दिनों तक, यह व्यापक अंतर्राज्यीय अभियान चलाया। इस दौरान 14 पुलिस टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने लगभग 22,270 किलोमीटर की दूरी तय की। यह अभियान मध्यप्रदेश सहित कुल पांच राज्यों के 21 जिलों में फैला हुआ था। अभियान में कुल 76 पुलिसकर्मियों ने मैदानी कार्य किया, जिसमें उन्होंने 149 दिवस लगाए। इस दौरान, पुलिस ने लगभग 190 व्यक्तियों से पूछताछ की और विभिन्न राज्यों की छह जेलों में निरुद्ध आरोपियों से भी पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। अपराधियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों ने 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का गहन विश्लेषण किया और 6,24,588 से अधिक टेलीफोन रिकॉर्ड की तकनीकी जांच की गई।
रेकी कर सर्राफा व्यापारियों को बनाया निशाना
पहली लूट की घटना 5 अगस्त 2026 को थाना किरनापुर क्षेत्र के रजेगांव में घटित हुई थी। उस दिन एक सर्राफा व्यापारी दुकान बंद करके सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य सामान से भरे दो बैग लेकर अपने घर की ओर जा रहा था। इसी दौरान, मोटरसाइकिल सवार अज्ञात आरोपियों ने उसका रास्ता रोक लिया और दोनों बैग लूटकर फरार हो गए।
दूसरी घटना 28 अगस्त 2026 को थाना लांजी क्षेत्र में हुई। इस वारदात में भी सर्राफा व्यापारी दुकान बंद करके आभूषणों और नकदी से भरे थैले लेकर घर जा रहा था। रास्ते में, आरोपियों ने उसकी मोटरसाइकिल को रोका, उसके साथ मारपीट की और फिर आभूषणों व नकदी से भरे दोनों थैले लूट लिए। दोनों ही घटनाओं में अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया था, जिससे उन्हें पकड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था।
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से मिली महत्वपूर्ण कड़ियां
घटनाओं के खुलासे में सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस टीमों ने सबसे पहले घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके बाद, रजेगांव से रायपुर, ओडिशा, संबलपुर और महासमुंद जैसे विभिन्न स्थानों के कैमरों के फुटेज का समय-क्रम के आधार पर मिलान किया गया, जिससे आरोपियों की संभावित दिशा और गति का पता चल सका।
साइबर सेल ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। घटनास्थल और संभावित मार्गों से संबंधित बड़ी संख्या में मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच की गई। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की गतिविधियों, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य उपलब्ध सूचनाओं को आपस में जोड़कर, पुलिस टीमों को आरोपियों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान किए गए। इन साक्ष्यों के आधार पर, पुलिस टीमों ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में दबिश दी और गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई।
पहचान छिपाने की कोशिशें नाकाम
पूछताछ के दौरान, गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने बालाघाट की दोनों लूट की वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। पुलिस अब इन आरोपियों से ओडिशा और अन्य राज्यों में की गई इसी प्रकार की अन्य वारदातों के संबंध में भी पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि 'ऐरागोल्ला गैंग' के सदस्य सर्राफा व्यापारियों की गतिविधियों की पहले से रेकी करते थे। वे अपनी पहचान छिपाने के लिए कई तरह की सावधानियां बरतते थे, जैसे कि बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों का उपयोग करना, हेलमेट पहनना, कपड़े बदलना और रास्ते में मोटरसाइकिलें बदलना। वारदात को अंजाम देने के बाद, वे तत्काल सुरक्षित और दूरस्थ स्थानों की ओर रवाना हो जाते थे, ताकि उनका कोई सुराग न मिल सके।
इस गिरोह द्वारा डिजिटल पहचान से बचने के लिए व्यक्तिगत सिम कार्ड या नियमित मोबाइल हैंडसेट का बहुत सीमित उपयोग किया जाता था। यही कारण था कि पुलिस के सामने आरोपियों की पहचान करना और उनकी आवाजाही का पता लगाना एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि, इन सभी बाधाओं के बावजूद, मध्यप्रदेश पुलिस की अथक मेहनत और तकनीकी विशेषज्ञता ने इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।
दोनों प्रकरणों में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए हैं। बालाघाट की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस केवल घटनास्थल तक सीमित जांच के बजाय, संगठित एवं अंतर्राज्यीय अपराधियों के विरुद्ध उनकी पूरी गतिविधि, आवागमन, संपर्क और नेटवर्क का गहन तकनीकी एवं मैदानी विश्लेषण कर प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है।
