अंतरराष्ट्रीय गीता ग्लोरी अवार्ड: 51 विभूतियों को विश्वशांति और सद्भाव के लिए किया गया सम्मानित
हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय गीता ग्लोरी अवार्ड एवं शांति सम्मेलन-2026 का आयोजन हुआ, जिसमें भारत और विदेश की 51 विभूतियों को गीता के सार्वभौमिक संदेश को फैलाने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | हरिद्वार | 2 नवंबर 2026
हरिद्वार के दिव्य चेतन आश्रम में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय गीता ग्लोरी अवार्ड एवं शांति सम्मेलन-2026 का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। धरा धाम इंटरनेशनल और अमेरिका स्थित पंडित तिलक राज शर्मा स्मृति न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में भारत सहित दुनिया भर की 51 प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षाविदों, पत्रकारों, साहित्यकारों, दार्शनिकों और समाजसेवियों ने शिरकत की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और इसके माध्यम से विश्वशांति, मानवता एवं अंतरधार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देना रहा।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में पंडित तिलक राज शर्मा स्मृति न्यास, अमेरिका के मुख्य न्यासी डॉ. इंद्रजीत शर्मा, इंडोनेशिया के प्रख्यात आध्यात्मिक एवं धार्मिक गुरु डॉ. धर्म यश ई. मादे, और धरा धाम इंटरनेशनल के प्रमुख तथा मानद कुलपति सौहार्द शिरोमणि संत सौरभ जी महाराज प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इन अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक वैश्विक आयाम प्रदान किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगदान देने वाली विभूतियों का सम्मान
अंतरराष्ट्रीय गीता ग्लोरी अवार्ड समारोह में विभिन्न देशों और क्षेत्रों में अपने विशिष्ट योगदान के लिए 51 विभूतियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली अंतरराष्ट्रीय हस्तियों में नी वायन रसमावती, देसाक पुतु सुदियास्तरी, मादे द्वि अंदिनी, देवा पुतु सुचिआर्ता, न्योमन अस्थाना कृष्ण पुत्र, केतुत सिल्वी कार्तिका, नी न्योमन आयु श्रीनति, नी केतुत राय पुष्पावती, आई केतुत विदर्मा, डॉ. बनवारीलाल जाजोदिया, डॉ. पुष्पा सिंह, रॉबर्टो गाल्बियाती, डेनियल डी पाल्मा तथा महंत ऋषिश्वरानंद जी महाराज शामिल थे। यह सम्मान उनके बहुआयामी कार्यों और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
भारतीय प्रतिभाओं को मिला पुरस्कार
भारत की कई प्रतिष्ठित विभूतियों को भी उनके सराहनीय कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया। भारतीय सम्मानित हस्तियों में डॉ. शंभू पंवार, डॉ. सर्वेश कांत वर्मा, डॉ. निशा अग्रवाल, डॉ. नारायण यादव, श्वेतिमा माधव प्रिया, डॉ. रागिनी पांडेय, डॉ. सच्चिदानंद झा शांडिल्य, अधिवक्ता केशव पांडेय, डॉ. शिवेश्वर दत्त पांडेय, डॉ. पी. एन. पांडेय, डॉ. विनीत कुमार, डॉ. टीकम सोनी, डॉ. शक्ति कुमार पांडेय, डॉ. गीतांजलि अरोड़ा, डॉ. बी. एल. यादव, डॉ. आशा शुक्ला, राजेश सिंह दतानपुरिया तथा हर्ष त्रिपाठी प्रमुख थे। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
शिक्षा, पत्रकारिता और समाजसेवा में असाधारण योगदान
सम्मानित विभूतियों में डॉ. शंभू पंवार का नाम अंतरराष्ट्रीय पत्रकार, दार्शनिक, लेखक एवं चिंतक के रूप में लिया गया, जो धरा धाम इंटरनेशनल के धरा गवर्नर भी हैं। डॉ. सर्वेश कांत वर्मा को उनके लेखन के लिए, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर भी हैं, सम्मानित किया गया। शिक्षाविद् डॉ. निशा अग्रवाल को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया। डॉ. नारायण यादव, जो एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निदेशक हैं, को भी सम्मानित किया गया। श्वेतिमा माधव प्रिया को अंतरराष्ट्रीय बाल भागवत कथावाचक के रूप में पहचान मिली है। डॉ. रागिनी पांडेय को मिसेज इंडिया, देहदानी और कवयित्री के रूप में उनके कार्यों के लिए मान्यता दी गई।
डॉ. सच्चिदानंद झा शांडिल्य, जो यूनाइटेड गुरुकुल काउंसिल के अध्यक्ष हैं, को भी उनके नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया। अधिवक्ता केशव पांडेय, जो दिव्य गंगा सेवा मिशन, हरिद्वार के राष्ट्रीय समन्वयक हैं, ने समाजसेवा में अपना योगदान दिया। डॉ. शिवेश्वर दत्त पांडेय, ग्राम टुडे समाचारपत्र के प्रबंध संपादक, और डॉ. पी. एन. पांडेय, स्वतंत्र पत्रकार एवं विजन दैनिक समाचारपत्र के प्रबंध संपादक, को पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया। डॉ. टीकम सोनी ने समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। डॉ. गीतांजलि अरोड़ा, गीतांजलि काव्य प्रसार मंच की अध्यक्ष, को साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. बी. एल. यादव एक वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर के रूप में पुरस्कृत हुए, जबकि डॉ. आशा शुक्ला ने कवयित्री के रूप में अपनी पहचान बनाई। राजेश सिंह दतानपुरिया, उत्तर प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के प्रदेश अध्यक्ष, और हर्ष त्रिपाठी, धरा धाम इंटरनेशनल के प्रतिनिधि, ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य किए, जिसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
गीता का संदेश: विश्वशांति और सर्वधर्म समभाव
सम्मेलन के दौरान, वक्ताओं ने श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं की वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रासंगिकता पर जोर दिया। प्रेम, करुणा, कर्तव्य, नैतिकता और परस्पर सम्मान जैसे मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह रेखांकित किया गया कि विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद, मानवता ही वह साझा सूत्र है जो सभी को एक साथ जोड़ता है। आयोजकों ने “वसुधैव कुटुम्बकम्—एक मानवता, एक परिवार” की भावना को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया। साथ ही, विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। इस समारोह ने शिक्षा, अध्यात्म, साहित्य, पत्रकारिता और समाजसेवा के माध्यम से विश्व में शांति एवं सद्भाव स्थापित करने के संदेश को सशक्त रूप से प्रसारित किया।
