आचार्य बालकृष्ण का जन्मोत्सव जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया
करेली में आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया। योग साधकों ने औषधीय पौधे रोपे और दीर्घायु की कामना की।

Kareli | संवाददाता: आशीष नेमा
द क्लिफ न्यूज़ | करेली | 7 नवंबर 2026
करेली के सोमवारा बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप संचालित वृद्धाश्रम में शनिवार को आचार्य बालकृष्ण का जन्मोत्सव एक विशेष आयोजन के रूप में संपन्न हुआ, जिसे जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर योग साधकों ने न केवल आचार्य बालकृष्ण के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु होने की कामना की, बल्कि औषधीय पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
योग कक्षा में उपस्थित योगाचार्य सुशील सोनी ने भारतीय आयुर्वेद की महत्ता और उसकी उपचार क्षमता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्वेद में प्रत्येक गंभीर रोग का प्रभावी उपचार संभव है, बशर्ते उसका सही तरीके से उपयोग किया जाए। उन्होंने जड़ी-बूटियों के दैनिक जीवन में महत्व को भी रेखांकित किया।
आचार्य बालकृष्ण के प्रति दीर्घायु की कामना
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभु श्री राम के समक्ष दीप प्रज्वलित कर हुई, जिसके बाद योग साधकों ने आचार्य बालकृष्ण के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए प्रार्थना की। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी मनोज कुमार नेमा ने आचार्य बालकृष्ण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के प्रति समर्पण को सराहा। उन्होंने बताया कि आचार्य जी के अथक प्रयासों से भारत की प्राचीन औषधीय पद्धतियों ने लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जनमानस को जागरूक करने का प्रयास
इस आयोजन में पतंजलि योग समिति के घनश्याम सूर्यवंशी, राकेश पटेल, ललित खत्री और सतीश जैन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच फलों का वितरण भी सुनिश्चित किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने तुलसी के पौधे के समीप यह संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में आयुर्वेद को प्राथमिकता देंगे। पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ-साथ अनेक औषधीय पौधों का रोपण भी किया गया। प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष नेमा ने जानकारी दी कि इस आयोजन का उद्देश्य औषधियों के वितरण के माध्यम से आम नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और आयुर्वेद की प्राचीन विधाओं को जन-जन तक पहुँचाना था।
