यूपीआई शुल्क विरोध: फर्रुखाबाद के व्यापारियों ने डीएम कार्यालय में सौंपा ज्ञापन
फर्रुखाबाद में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में व्यापारियों ने यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% शुल्क का विरोध किया। नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 18 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले व्यापारियों ने यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) लेनदेन पर लगाए जा रहे 0.4 प्रतिशत शुल्क के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शुक्रवार को व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने फतेहगढ़ स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार से मुलाकात की और इस प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल में जिला महामंत्री रविकांत गुप्ता, नगर महामंत्री विवेक कुमार गुप्ता, संगठन मंत्री अर्पित गुप्ता, युवा नगर अध्यक्ष सलमान खान और मीडिया प्रभारी अनवर पठान सहित लगभग 50 व्यापारी शामिल थे। सत्यवीर सिंह, ओमवीर सिंह, अमन कश्यप, माइकल गुप्ता, तोसीम खान और मुन्ना जैसे अन्य व्यापारियों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रस्तावित शुल्क पर व्यापारियों की आपत्ति
व्यापारियों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क छोटे कारोबारियों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ साबित होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में ही कई व्यवसाय न्यूनतम लाभ मार्जिन पर काम कर रहे हैं, और इस शुल्क से उनके लिए परिचालन लागत बढ़ जाएगी, जिससे अंततः ग्राहकों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के सरकारी प्रयासों का समर्थन करता रहा है, लेकिन इस तरह के शुल्क उस भावना के विपरीत हैं।
प्रशासन ने दिया मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन
नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने उपस्थित व्यापारियों की समस्याओं और आपत्तियों को धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि व्यापारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों और उनकी मांगों को संबंधित सरकारी तंत्र के माध्यम से शासन के उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा। नगर मजिस्ट्रेट के इस सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए व्यापारियों ने उनका आभार व्यक्त किया। यह विरोध प्रदर्शन डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर लागू होने वाले संभावित अतिरिक्त वित्तीय भार को लेकर छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों की चिंताओं को उजागर करता है।
