यूपी में आई.ए.एस. अधिकारी के इस्तीफे पर कांग्रेस ने राज्यपाल को लिखा पत्र
यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय राय ने आई.ए.एस. अधिकारी के इस्तीफे पर चिंता जताते हुए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | लखनऊ | 31 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय राय ने प्रदेश की महामहिम राज्यपाल को एक पत्र लिखकर सक्षम एवं ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों के सम्मान और स्वतंत्र कार्यप्रणाली की रक्षा तथा इस विषय को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की एक प्रतिभाशाली आई.ए.एस. अधिकारी ने लगभग 13 वर्ष की सेवा के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा से अपना त्यागपत्र सार्वजनिक किया है, जो अत्यंत चिंता का विषय है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने पत्र में उल्लेख किया है कि यह वही अधिकारी हैं जिन्होंने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से प्रतिष्ठित शिक्षा प्राप्त करने के बाद विदेश की अच्छी नौकरी छोड़कर देश की सेवा के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा को चुना था। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी के रूप में कार्य करते हुए जनहित के कई उल्लेखनीय कार्य किए। उनके द्वारा अचानक सेवा से अलग होने के निर्णय को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
अधिकारी के इस्तीफे पर कांग्रेस की चिंता
पत्र के अनुसार, यह अधिकारी, जो अपने कार्यकाल में सक्षम साबित हुईं, को फील्ड की जिम्मेदारियों से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया था। इसी के उपरांत उन्होंने सेवा छोड़ने का निर्णय लिया। यद्यपि उन्होंने स्वयं इस्तीफे का कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस ने इसे वर्तमान भाजपा सरकार के 2017 में सत्ता में आने के बाद से इस तरह के मामलों में वृद्धि के रूप में देखा है। पूर्व में भी प्रदेश के 13 अन्य भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों द्वारा इस्तीफा या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए इसे 'गंभीर आत्ममंथन का विषय' बताया गया है।
जनसमस्याओं पर उठाए सवालों पर भी उठाया गया मुद्दा
श्री राय ने यह भी रेखांकित किया कि हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा गोरखपुर की व्यवस्थाओं पर स्वयं सवाल उठाए गए थे। इसी बीच गोरखपुर के सांसद द्वारा एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर कहा गया कि “हमें तो गोरखपुर स्पेन जैसा दिखता है, तुम अंधे हो तो हम क्या करें।” इस भाषा को जनसमस्याओं पर सवाल उठाने वालों के प्रति संवेदनशीलता की कमी का प्रतीक बताया गया है। दुखद स्थिति यह बताई गई कि जिस समारोह में यह बयान दिया गया, उसमें स्वयं मुख्यमंत्री को हंसते हुए देखा गया।
संविधान और जनता के लिए काम करने वाले अधिकारी
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस चिंताजनक स्थिति को तत्काल केंद्र सरकार के समक्ष उठाएँ। उनका मानना है कि यदि संविधान और नियमों के अनुसार कार्य करने वाले वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी योग्यता और अनुभव के अनुरूप सम्मानपूर्वक कार्य नहीं कर पाएंगे, तो छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ने वाले राजनीतिक दबाव की स्थिति और भी गंभीर होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि संविधान और जनता के लिए काम करता है। इस संस्था की निष्पक्षता और सम्मान की रक्षा को लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
