यूजीसी-नेट: तीन विषयों की परीक्षा रद्द, सितंबर में पुनर्परीक्षा
एनटीए ने यूजीसी-नेट जून 2026 की अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। गंभीर त्रुटियों के कारण सितंबर में इन विषयों की पुनर्परीक्षा होगी।

द क्लिफ न्यूज़ | 17 अगस्त 2026
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी-नेट जून 2026 की परीक्षाओं में अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के प्रश्नपत्रों में पाई गई गंभीर त्रुटियों, भाषा संबंधी खामियों और पुराने प्रश्नों के बड़े पैमाने पर दोहराव के कारण इन तीन विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। एनटीए ने घोषणा की है कि इन विषयों की पुनर्परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी। विशेषज्ञ समिति की जांच में प्रश्नपत्रों से जुड़ी कई ऐसी कमियां सामने आईं, जिन्हें केवल उत्तर कुंजी में सुधार या कुछ प्रश्न हटाकर ठीक करना संभव नहीं था। इस कारण, तीनों विषयों की पूरी परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया।
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि पुनर्परीक्षा के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह फैसला उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा है जो इस परीक्षा से प्रभावित हुए हैं। वहीं, यूजीसी-नेट जून 2026 के अन्य 84 विषयों की परीक्षाएं और उनके परिणाम इस निर्णय से अप्रभावित रहेंगे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही जारी किए जाएंगे।
सितंबर में होंगी पुनर्परीक्षाएं, तिथियां घोषित
एनटीए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के लिए पुनर्परीक्षाएं सितंबर 2026 में आयोजित होंगी। अंग्रेजी विषय की परीक्षा 9 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी। इसी दिन, दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक कॉमर्स विषय की परीक्षा संपन्न होगी। सोशियोलॉजी की पुनर्परीक्षा 10 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित है। एनटीए परीक्षा केंद्र, सिटी इंटिमेशन स्लिप और एडमिट कार्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारी अभ्यर्थियों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से प्रदान करेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए केवल एनटीए द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
यूजीसी-नेट परीक्षा के तुरंत बाद, अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता पर चिंता जताई थी। शिकायतों में टाइपिंग की गलतियां, भाषा की समस्याएं, अनुवाद में त्रुटियां और तथ्यात्मक अशुद्धियां शामिल थीं। इसके अलावा, कई अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि पुराने प्रश्नपत्रों से बड़ी संख्या में प्रश्न हूबहू दोहराए गए। विशेष रूप से समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र में 150 में से 67 प्रश्नों के दोहराए जाने की शिकायत ने परीक्षा की निष्पक्षता और प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों से मिलते-जुलते प्रश्न आना सामान्य है, लेकिन यदि प्रश्न बड़ी संख्या में उसी रूप में दोहराए जाते हैं, तो यह परीक्षा में समान अवसर और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
NSUI ने जताई चिंता, जवाबदेही की मांग
परीक्षा रद्द होने और पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भी परीक्षा व्यवस्था पर विरोध दर्ज कराया है। छात्र संगठन ने प्रश्नपत्रों में हुई गड़बड़ियों को गंभीर बताते हुए एनटीए की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठाए। NSUI का कहना है कि परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों ने महीनों तक मेहनत की थी, और अब उन्हें दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी होगी। संगठन ने सवाल उठाया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की गलतियों का बोझ छात्रों पर क्यों पड़े। NSUI ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रश्नपत्र तैयार करने की व्यवस्था में सुधार की मांग की है। छात्र संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने से पहले गुणवत्ता की कई स्तरों पर जांच होनी चाहिए। NSUI पूर्व में भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दों को लेकर विरोध करता रहा है और इस बार भी उसने परीक्षा व्यवस्था को विश्वसनीय बनाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग को प्रमुखता दी है।
पुनर्परीक्षा की चुनौती और अभ्यर्थियों की चिंता
पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, लेकिन यह प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए एक नई चुनौती पेश करता है। जून में परीक्षा देने के बाद, कई उम्मीदवार परिणाम का इंतजार कर रहे थे और उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई या करियर की योजनाएं बना ली होंगी। अब उन्हें सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी होगी, जिसके लिए उन्हें पूरे पाठ्यक्रम को दोहराना होगा और नई रणनीति बनानी होगी। अतिरिक्त परीक्षा शुल्क न लेना एक राहत की बात है, लेकिन तैयारी में लगने वाला समय और मानसिक दबाव छात्रों के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि एनटीए को अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय और स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए ताकि वे बिना भ्रम के तैयारी कर सकें।
एनटीए की परीक्षा प्रणाली पर फिर उठे सवाल
तीन विषयों की परीक्षा रद्द होने के बाद, एनटीए की परीक्षा प्रणाली एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार करना एक अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसमें विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रश्न निर्माण के बाद तथ्यात्मक जांच, भाषा संपादन, अनुवाद और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कई चरण शामिल होते हैं। प्रश्नपत्रों में त्रुटियां केवल संपादकीय गलती नहीं होतीं, बल्कि वे सीधे अभ्यर्थियों के अंकों और रैंक को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए, प्रश्नपत्र की गुणवत्ता परीक्षा की विश्वसनीयता का आधार है। पुराने प्रश्नों के बड़े पैमाने पर दोहराव की शिकायत भी गंभीर है, क्योंकि यह सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं देता।
पारदर्शी प्रक्रिया और भविष्य की राह
एनटीए के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करना है। अभ्यर्थियों को समय पर परीक्षा केंद्र, समय और एडमिट कार्ड जैसी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। नए प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा और इसके लिए विशेषज्ञों की एक मजबूत टीम और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था आवश्यक होगी। NSUI जैसे छात्र संगठनों द्वारा उठाए गए सवालों का समाधान केवल पुनर्परीक्षा से नहीं होगा, बल्कि छात्रों के बीच यह विश्वास जगाना भी जरूरी है कि परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष है और गलती होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
भविष्य से जुड़ा सवाल: विश्वसनीयता बहाली का अवसर
यूजीसी-नेट विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। हजारों युवाओं के करियर की दिशा इससे तय होती है, इसलिए परीक्षा की विश्वसनीयता उनके भविष्य से जुड़ी है। तीन विषयों की पुनर्परीक्षा का फैसला प्रभावित अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर देने की एक कोशिश है। अतिरिक्त शुल्क न लेना राहत देता है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करना भी आवश्यक है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की जिम्मेदारी केवल परीक्षा कराने तक सीमित नहीं है; प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, पारदर्शिता, परिणाम की विश्वसनीयता और शिकायतों के समाधान तक पूरी व्यवस्था को जवाबदेह बनाना होगा। सितंबर में होने वाली पुनर्परीक्षा एनटीए के लिए अपनी विश्वसनीयता बहाल करने का अवसर है। यदि परीक्षा बिना किसी त्रुटि और पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित होती है, तो छात्रों का विश्वास मजबूत होगा। NSUI और अन्य छात्र संगठनों की मांगों को गंभीरता से लेकर भविष्य की परीक्षाओं में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए स्थायी सुधार करना अब सबसे बड़ी आवश्यकता है।
