यमन से 12 भारतीय नाविकों की सफल वापसी, विदेश मंत्रालय ने ऑपरेशन का नेतृत्व किया
युद्धग्रस्त यमन में फंसे 'एमएसवी फ़ैज़ नूर ओलिया' जहाज के 12 भारतीय नाविकों को भारतीय विदेश मंत्रालय और रियाद स्थित भारतीय दूतावास के कूटनीतिक प्रयासों से सुरक्षित भारत वापस लाया गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | 13 अगस्त 2026
युद्धग्रस्त यमन में फंसे 'एमएसवी फ़ैज़ नूर ओलिया' नामक जहाज के 12 भारतीय नाविकों को भारतीय विदेश मंत्रालय और खाड़ी क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावासों के सफल कूटनीतिक समन्वय से सुरक्षित निकाला गया है। यमन के अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इन नाविकों को भारत के लिए रवाना कर दिया गया है, जो एक बड़ी राहत की खबर है।
रियाद स्थित भारतीय दूतावास, जो यमन में भारतीय दूतावास के संचालन का कार्यभार देख रहा है, ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यमन के अधिकारियों के साथ मिलकर 12 क्रू सदस्यों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की गई है। दूतावास ने सहयोग के लिए यमन के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और नाविकों की सुरक्षित यात्रा की कामना की।
जहाज पर हमले के बाद तत्काल प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के झंडे वाले इस व्यावसायिक जहाज पर हाल ही में यमन के तट के पास हमला हुआ था। इस हमले की सूचना मिलते ही नई दिल्ली स्थित भारतीय विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भारतीय दूतावास तुरंत सक्रिय हो गए थे। जहाज पर सवार सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई थी। रियाद स्थित दूतावास लगातार पूरी स्थिति पर बारीक नज़र बनाए हुए था, जिसमें क्रू सदस्यों की सुरक्षा और उनकी तत्काल वापसी सुनिश्चित करना शामिल था।
जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन में कूटनीतिक तालमेल
यमन में सुरक्षा की गंभीर चुनौतियों के बावजूद, भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने अथक प्रयास करते हुए यमन प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक तालमेल स्थापित किया। इस जटिल समन्वय से ही यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल हो सका। हमले का शिकार हुए जहाज से सभी क्रू सदस्यों को न केवल सुरक्षित बाहर निकाला गया, बल्कि अदन में उनके ठहरने, भोजन-पानी और यात्रा संबंधी दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया को भी तेज़ी से पूरा किया गया।
वापसी पर नाविकों ने जताया आभार
भारत वापसी के लिए उड़ान भरते समय, सभी 12 क्रू सदस्यों ने भारत सरकार और दूतावास के अधिकारियों का तहे दिल से आभार व्यक्त किया। यह सफल बचाव अभियान इस बात को पुनः रेखांकित करता है कि दुनिया के किसी भी कोने में संकट में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारत की 'संकटमोचक' कूटनीति हमेशा तत्पर रहती है।
