सीहोर VIT हिंसा ने खोली उच्च शिक्षण संस्थानों की पोल: दूषित पानी, गंदा खाना और कुप्रबंधन की शिकायतें शहरभर में आम
सीहोर जिले स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) के कैंपस में मंगलवार रात खराब भोजन और दूषित पानी को लेकर हुए उग्र विरोध ने राजधानी...

सीहोर जिले स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) के कैंपस में मंगलवार रात खराब भोजन और दूषित पानी को लेकर हुए उग्र विरोध ने राजधानी के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में मौजूद लंबे समय से चले आ रहे अव्यवस्था के मुद्दे उजागर कर दिए हैं। MANIT, RGPV और माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों में भी हाल के महीनों में छात्रों ने भोजन, पानी और साफ-सफाई को लेकर गंभीर शिकायतें उठाई हैं।
MANIT: अप्रैल में फूड पॉइजनिंग, लेकिन जांच में नहीं मिला निष्कर्ष
अप्रैल 2025 में मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) में करीब 40 छात्रों को हॉस्टल मेस में परोसे गए आलू परांठे खाने के बाद फूड पॉइजनिंग हुई। इनमें 15 छात्रों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
इसके बाद राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीम ने मेस का निरीक्षण कर नमूने लिए, लेकिन जांच में कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया। छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाएं लंबे समय से होती आ रही हैं।
RGPV: ठेकेदार बदला, लेकिन 1.30 लाख रुपए लेकर फरार
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में शिकायतों पर दो महीने पहले मेस-कैंटीन ठेकेदार को बदला गया।
लेकिन नई समस्या तब सामने आई जब ठेकेदार छात्रों से लिए गए 1.30 लाख रुपए एडवांस लेकर फरार हो गया। छात्रों ने यह राशि महीनेभर के भोजन के लिए जमा की थी।
छात्रों का आरोप है कि कैंपस में पानी के कूलर खराब रहते हैं और कैंटीन की स्वच्छता बेहद खराब है।
MCU: गंदे पानी और कैंटीन को लेकर लगातार विरोध
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (MCU) में भी छात्रों ने हाल ही में गंदे पानी, खराब कैंटीन और बदहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर विरोध जताया।
पूर्व ABVP अध्यक्ष अमीषा कच्छावा ने बताया कि
“पिछले हफ्ते कुलपति और रजिस्ट्रार को ज्ञापन देकर 7 दिनों में स्वच्छ, फ़िल्टर्ड पानी उपलब्ध कराने की मांग की थी। VIT घटना के बाद अब कैंटीन सुधार का काम शुरू हुआ है।”
VIT विरोध के बाद खुली व्यवस्थाओं पर उंगली
VIT सीहोर में छात्रों के उग्र विरोध के पीछे कारण बताया गया कि—
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कैम्पस में लंबे समय से दूषित पानी,
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मेस में घटिया गुणवत्ता का भोजन,
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और प्रशासन की लगातार अनदेखी
के खिलाफ शिकायतें लंबित थीं।
छात्र संगठनों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता कहती है कि “दबाव के बिना सुधार नहीं होते।”
छात्र संगठनों के अलग-अलग दृष्टिकोण
MANIT Students’ Council:
काउंसिल अध्यक्ष आयुष सिंह ने कहा कि
“मेस मैनेजमेंट छात्रों के नियंत्रण में है। यदि गुणवत्ता खराब मिले तो हम तुरंत वेंडर बदल देते हैं।”
ABVP का दावा:
राज्य मीडिया प्रमुख शिवम जाट ने कहा,
“छात्र सिर्फ मेन्यू तय कर सकते हैं। कुक और स्टाफ का चयन MANIT प्रशासन करता है, छात्रों का इसमें कोई अधिकार नहीं है।”
उनके अनुसार, बर्कतुल्लाह विश्वविद्यालय में मेस का पूरा प्रबंधन छात्रों के हाथ में है — यह मॉडल अन्य संस्थानों को भी अपनाना चाहिए।
NSUI का आरोप:
भोपाल जिला NSUI अध्यक्ष अक्षय तोमर ने दावा किया कि RGPV में परोसा जाने वाला भोजन “बेहद निम्न स्तर का” है।
तोमर का कहना है कि VIT जैसी घटनाओं की जड़ में छात्र संघ चुनावों का न होना है।
“छात्रों के पास अपनी शिकायतें रखने के लिए चुने हुए प्रतिनिधि नहीं होते। प्रशासन को शिकायत देने पर छात्रों को ही परेशान किया जाता है।”
कैंपस मैनेजमेंट पर बड़े सवाल
शहर के प्रमुख विश्वविद्यालयों में लगातार सामने आ रहे समान मुद्दों ने उच्च शिक्षा संस्थानों के सुरक्षा मानकों, स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि—
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पारदर्शी मेस प्रबंधन,
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पानी की गुणवत्ता पर नियमित जांच,
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और छात्र प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी
के बिना स्थायी सुधार संभव नहीं।
