विन्ध्याचल में 'परंपरा' का 9वां शास्त्रीय संगीत समारोह संपन्न
मीरजापुर के विन्ध्याचल धाम में 'महेश्वर साधना ललित कला प्रशिक्षण केन्द्र' द्वारा 9वां शास्त्रीय संगीत समारोह 'परंपरा' आयोजित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार सलिल पाण्डेय को 'परंपरा सम्मान' से सम्मानित किया गया।

संवाददाता: शशि भूषण दूबे कंचनीय यूपी स्टेट ब्यूरो प्रमुख
द क्लिफ न्यूज़ | मीरजापुर | 1 सितंबर 2026
मीरजापुर के पवित्र विन्ध्याचल धाम में भारतीय शास्त्रीय कला, सुर, लय और भाव की त्रिवेणी में रसिकजनों को मंत्रमुग्ध करने वाला 9वां शास्त्रीय संगीत समारोह 'परंपरा' संपन्न हुआ। 'महेश्वर साधना ललित कला प्रशिक्षण केन्द्र' द्वारा विन्ध्य रत्न स्मृतिशेष पं० महेश्वरपति त्रिपाठी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस गरिमामयी समारोह का शुभारंभ माँ विन्ध्यवासिनी मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन और माँ के चरणों में वंदना से हुआ।
समारोह में भारतीय सनातन संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता में अप्रतिम योगदान के लिए वरिष्ठ पत्रकार एवं आध्यात्मिक लेखक श्री सलिल पाण्डेय जी को 'परंपरा सम्मान' से नवाजा गया। वाणिज्य कर विभाग (CGST) के डिप्टी कमिश्नर श्री मनोज कुमार ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की और समारोह की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति का गौरव बताया। श्री पाण्डेय को मंचस्थ अतिथियों एवं आयोजकों द्वारा अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
शास्त्रीय कलाओं का अद्भुत संगम
इस अवसर पर देश के विभिन्न सांस्कृतिक केंद्रों से पधारे कलाकारों ने अपनी अलौकिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने समां बांध दिया। काशी की सुप्रसिद्ध गायिका सुश्री अलंकृता रॉय ने अपने सुमधुर और गंभीर शास्त्रीय गायन से वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
सितार और बांसुरी की कर्णप्रिय जुगलबन्दी सुनने को मिली, जिसमें डॉ० संगीता सिंह और सुश्री श्रेया मिश्रा ने सितार वादन किया, वहीं श्री सुधीर गौतम ने बांसुरी वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बनारस घराने के मूर्धन्य विद्वान, पदम् विभूषण तबला सम्राट पं० किशन महाराज जी के सुपुत्र एवं समारोह के संरक्षक पं० पूरण महाराज जी और उनकी सुपुत्री सुश्री अवंतिका महाराज ने तबला-पखावज की थाप, तिहाइयों और परनों की जुगलबन्दी प्रस्तुत की, जिसने पूरे प्रांगण को झंकृत कर दिया।
नृत्य और संगतकारों का उत्कृष्ट प्रदर्शन
नृत्य की प्रस्तुतियों में कु० वारन्या सिन्हा ने एकल कत्थक नृत्य और श्री रविशंकर मिश्र व डॉ ममता टंडन ने युगल कत्थक नृत्य से भाव-भंगिमा और पद-संचालन का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कोलकाता से पधारे श्री आद्रिजा कुंडरु ने अपनी ओडिसी नृत्य प्रस्तुति से देवांगना सा लावण्य बिखेरा। समारोह में पं० गौरव मिश्र, डॉ० रजनीश तिवारी, श्री देव नारायण और श्री मोहित साहनी ने संगतकार के रूप में अपनी सशक्त भूमिका निभाई।
पूरे कार्यक्रम का गरिमामय एवं काव्यात्मक मंच संचालन श्री सौरभ चक्रवर्ती ने किया। समारोह का समापन संस्था के व्यवस्थापक श्री दिनेश्वरपति त्रिपाठी द्वारा किया गया। अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश मिश्र और सचिव श्री विन्ध्यवासिनी प्रसाद केसरवानी ने सभी आगंतुक अतिथियों, विद्वान कलाकारों एवं कलाप्रेमी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। इस दौरान विनीत जायसवाल, सत्यम पाण्डे, अभिनवपति त्रिपाठी, विजय बाबू मिश्रा, पंकज द्विवेदी (अध्यक्ष विन्ध्य पंडा समाज), अशोक सिंह एडवोकेट, अरुण मिश्रा, आशु पाठक, कार्तिकेय पांडेय, मनीष शर्मा, ओमशंकर गिरि सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। संस्था ने भारतीय कला-संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के इस अनुष्ठान को प्रतिवर्ष इसी भव्यता से आयोजित करने का संकल्प दोहराया।
