विनय कुमार साहू: बेमेतरा, नारायणपुर के बाद अब बालोद में ASP
विनय कुमार साहू ने बेमेतरा के बेरला में एसडीओपी, नारायणपुर में नक्सल मोर्चे पर साहस दिखाया। अब वे बालोद में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | बेमेतरा | 15 अगस्त 2026
पुलिस अधिकारी विनय कुमार साहू अपनी सेवा के दौरान कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और साहस के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बेमेतरा जिले के बेरला में एसडीओपी के रूप में कार्य करते हुए पुलिसिंग को आम जनता के करीब लाया और एक सकारात्मक छवि स्थापित की। इसके बाद, नारायणपुर जैसे अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया। वर्तमान में, श्री साहू बालोद जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, जहाँ से उनसे बेहतर कानून-व्यवस्था और प्रभावी पुलिसिंग की उम्मीद की जा रही है।
बेमेतरा में जनसरोकार से जुड़ी पुलिसिंग
विनय कुमार साहू ने जब बेमेतरा जिले के बेरला में एसडीओपी का पद संभाला, तब उनकी कार्यशैली ने लोगों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि पुलिस और आम जनता के बीच संवाद को भी प्राथमिकता दी। अपराध नियंत्रण, लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान और संवेदनशील मामलों में प्रभावी कार्रवाई उनकी कार्यप्रणाली के मुख्य स्तंभ थे।
उनके कार्यकाल में पुलिसिंग को सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई तक सीमित न रखकर, इसे जनसरोकार से जोड़ा गया। ग्रामीण इलाकों में पुलिस की उपस्थिति बढ़ाना, स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुनना और कानून के प्रति उनका विश्वास मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा। इस दृष्टिकोण ने पुलिस विभाग के भीतर भी उनकी एक विशिष्ट पहचान बनाई।
नारायणपुर के मोर्चे पर साहस और अनुभव
बेरला में अपनी सेवाएं देने के बाद, श्री साहू को नारायणपुर जैसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कार्य करने का अवसर मिला। बस्तर संभाग का नारायणपुर जिला लंबे समय से नक्सल गतिविधियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में एक पुलिस अधिकारी के लिए न केवल प्रशासनिक दक्षता, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने का साहस, अपनी टीम का प्रभावी नेतृत्व करने की क्षमता और जवानों का मनोबल बनाए रखने का जज्बा भी अनिवार्य होता है।
नारायणपुर के नक्सल मोर्चे पर विनय कुमार साहू ने इसी साहस और कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया। घने जंगलों, दुर्गम इलाकों और निरंतर सुरक्षा जोखिमों के बीच पुलिसिंग करना अत्यंत कठिन होता है। इन कठिन परिस्थितियों ने उनके मैदानी अनुभव को और समृद्ध किया और उनकी नेतृत्व क्षमता को नई धार दी।
बालोद में नई भूमिका और अपेक्षाएं
बेमेतरा के मैदानी अनुभव और नारायणपुर के चुनौतीपूर्ण सुरक्षा अभियानों से प्राप्त अनुभव के पश्चात, विनय कुमार साहू अब बालोद जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। यह नई जिम्मेदारी न केवल उनके करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि उन्हें एक व्यापक पुलिस प्रशासन को संभालने का अवसर भी प्रदान करती है।
बालोद जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में, श्री साहू की जिम्मेदारियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों पर नियंत्रण, पुलिस अधिकारियों व जवानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और आम जनता की शिकायतों का प्रभावी निराकरण शामिल है। बालोद जैसे जिले की शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की अलग-अलग चुनौतियों को देखते हुए, प्रभावी पुलिसिंग के लिए त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी।
अनुशासन, संवेदनशीलता और साहस का संगम
विनय कुमार साहू के पुलिस सेवा के सफर में अनुशासन, संवेदनशीलता और साहस का एक उल्लेखनीय संगम देखने को मिलता है। एक पुलिस अधिकारी के लिए जहाँ कानून के प्रति कड़े रुख अपनाना आवश्यक है, वहीं आम नागरिकों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए उनमें संवेदनशीलता का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बेमेतरा में एसडीओपी के तौर पर उन्होंने जनसंपर्क और प्रभावी पुलिसिंग के बीच एक सराहनीय संतुलन स्थापित किया, जबकि नारायणपुर में उन्होंने गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। अब बालोद में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में, उनके सामने इन दोनों अनुभवों को एक वृहद स्तर पर लागू करने का अवसर है।
उनकी कार्यशैली को उम्मीद की नजरों से देखा जा रहा है, जहाँ आम नागरिकों को उनसे बेहतर कानून-व्यवस्था, अपराधों पर अंकुश और संवदेदनशील पुलिसिंग की उम्मीद है। आने वाले समय में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनका अनुभव और नेतृत्व बालोद जिले की पुलिस व्यवस्था को किस प्रकार नई दिशा प्रदान करता है।
