विकसित भारत की ओर: PM मोदी ने सचिवों संग सुशासन, आत्मनिर्भरता पर जोर दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने के लिए सुशासन, आत्मनिर्भरता और साइबर सुरक्षा के मंत्र दिए।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुशासन, आत्मनिर्भरता और साइबर सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक जोर दिया। 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की भावी कार्ययोजनाओं की गहन समीक्षा की गई, जिसमें वित्त, अर्थव्यवस्था, वाणिज्य, उद्योग और प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों की प्राथमिकताओं, प्रगति और आगामी रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों से मंत्रालयों और विभागों के बीच एक मजबूत टीम भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार के सभी विभाग एक साझा उद्देश्य और समन्वित दृष्टिकोण के साथ मिलकर कार्य करें। इस तालमेल को सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की कार्यगत बाधाओं को समाप्त करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, ताकि योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
जन-केंद्रित सुशासन और नवाचार पर बल
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को दोहराया कि सरकार की प्रत्येक नीति और निर्णय का मूल देश का नागरिक होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन-केंद्रित सुशासन सरकार की सर्वोपरि प्राथमिकता है और हर निर्णय आम नागरिकों की आकांक्षाओं तथा हितों को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि सरकारी प्रयास जमीनी स्तर पर लोगों की भलाई और विकास में योगदान दें।
उन्होंने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि भारत बुनियादी ढांचे के विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ स्वदेशी तकनीकों के विकास और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता को समान महत्व देना होगा। प्रधानमंत्री ने घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर तकनीकी रूप से अग्रणी बन सके।
ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की अनिवार्यता
ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के एक अभिन्न अंग के रूप में देखते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए नवाचार, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और क्षमता निर्माण की गति को तेज करना होगा। उनके अनुसार, ऊर्जा आत्मनिर्भरता न केवल नागरिकों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दीर्घकालिक आर्थिक विकास की आधारशिला भी है। इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
निरंतर सुधार और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री ने सुधारों को केवल एक अस्थायी प्रचलन या फैशन के बजाय प्रभावी शासन की सतत आवश्यकता बताया। उन्होंने अधिकारियों से कार्यप्रणालियों में निरंतर सुधार, बेहतर कार्य संस्कृति और संस्थागत दक्षता को मजबूत करने पर जोर देते हुए परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उनका मानना है कि यह निरंतरता और दक्षता सरकारी तंत्र को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगी, जिससे अंतिम परिणाम नागरिकों के लिए बेहतर होंगे।
साइबर सुरक्षा: एक राष्ट्रीय जनभागीदारी अभियान
डिजिटल युग की बढ़ती चुनौतियों का सामना करते हुए, प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करने की तत्काल आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे डिजिटल प्रणालियों और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने उभरते साइबर खतरों के प्रति निरंतर सतर्क रहने और युवा नवोन्मेषकों तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाकर साइबर सुरक्षा को जनभागीदारी का एक राष्ट्रीय अभियान बनाने का आह्वान किया। यह पहल देश की डिजिटल संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
रणनीतिक संवाद और कौशल विकास
प्रधानमंत्री ने रणनीतिक क्षेत्रों में प्रभावी संवाद और जनसंपर्क की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में देश महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, वहां सही जानकारी समय पर जनता तक पहुंचनी चाहिए, ताकि भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों और बेबुनियाद आशंकाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
रोजगार और कौशल विकास के संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने भविष्य के उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने पर जोर दिया। इसके लिए, उन्होंने उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच एक मजबूत साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा युवा, गतिशील, नवाचारी और दूरदर्शी बने रहना होगा, ताकि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और नई चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तेजी से ढाला जा सके।
इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने विभागों की उपलब्धियों, प्राथमिकताओं, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में भाग लिया। इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में प्रशासनिक समन्वय, सुशासन, तकनीकी आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, कौशल विकास और साइबर सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सरकार की दीर्घकालिक रणनीति को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
