विधानसभा में गलत जानकारी पर मंत्री ने दिया संशोधन वक्तव्य
मध्य प्रदेश विधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दे पर गुरुवार को संशोधित वक्तव्य दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 22 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान, स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को सदन में एक महत्वपूर्ण संशोधन वक्तव्य प्रस्तुत किया। यह वक्तव्य कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह द्वारा उठाए गए एक मुद्दे पर सरकार द्वारा पूर्व में दी गई तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी को सुधारने के लिए था। यह घटना विधानसभा में सरकारी सूचनाओं की सटीकता और विधायकों के विशेषाधिकारों पर प्रकाश डालती है।
पूरा मामला जुलाई 2025 के विधानसभा सत्र से जुड़ा है, जब जयवर्धन सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित एक तारांकित प्रश्न पूछा था। विभाग द्वारा दिए गए उत्तर में कथित तौर पर गलत जानकारी शामिल थी। इस विसंगति को देखते हुए, जयवर्धन सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और विधानसभा के प्रमुख सचिव के समक्ष इस मामले को उठाया। उन्होंने बार-बार लिखित शिकायतें कीं, जिसके बाद विधानसभा सचिवालय ने स्कूल शिक्षा विभाग से स्पष्टीकरण मांगा।
गलती स्वीकारने में हुई देरी
मामले की गंभीरता को समझते हुए, जयवर्धन सिंह ने नवंबर 2025 के विधानसभा सत्र में उसी विषय पर एक बार फिर प्रश्न उठाया। इस बार, विभाग ने स्वीकार किया कि पिछली बार सदन को दी गई जानकारी त्रुटिपूर्ण थी। गलती स्वीकार किए जाने के बाद, जयवर्धन सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नियमों के अनुसार मंत्री से सदन में संशोधन वक्तव्य जारी करवाने की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर, विधानसभा सचिवालय ने स्कूल शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया। विभाग ने मंत्री का संशोधन वक्तव्य तैयार कर विधानसभा को भेजा। नियमानुसार, विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में जयवर्धन सिंह से भी सहमति प्राप्त की। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद, मानसून सत्र 2026 के तीसरे दिन, बुधवार को स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने अंततः सदन में वह संशोधन वक्तव्य प्रस्तुत किया, जिसमें पूर्व में दी गई गलत जानकारी को संशोधित किया गया।
विपक्ष की जवाबदेही और विधानसभा की गरिमा
इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सरकार का यह परम दायित्व है कि वह सदन को तथ्यपूर्ण, सटीक और संपूर्ण जानकारी प्रदान करे। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हाल के दिनों में कई सरकारी विभाग विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के अधूरे, भ्रामक या गलत उत्तर दे रहे हैं, जो न केवल सदन की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि विधायकों के विशेषाधिकारों का भी हनन है।
जयवर्धन सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष की भूमिका केवल प्रश्न पूछना नहीं है, बल्कि सरकार को जवाबदेह ठहराना भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार या उसके विभाग सदन को गलत जानकारी देंगे, तो कांग्रेस हर स्तर पर इसका विरोध करेगी और नियमों का उपयोग करके सरकार को सही जानकारी देने के लिए बाध्य करेगी। उन्होंने इस मामले को एक उदाहरण बताया कि कैसे एक समर्पित विधायक तथ्यों के साथ निरंतर प्रयास करके सरकार को अपनी गलती सुधारने के लिए मजबूर कर सकता है।
भविष्य के लिए उठाए गए कदम
जयवर्धन सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेने और नियमों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मांग भी उठाई: यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी विभाग द्वारा सदन को गलत या भ्रामक जानकारी देने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका मानना है कि इस तरह के कदम विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
यह घटना सरकारी पारदर्शिता, विधायी प्रक्रिया की अखंडता और विपक्ष की निगरानी की भूमिका के महत्व को रेखांकित करती है। सदन को सटीक जानकारी प्रदान करना न केवल एक विधिक आवश्यकता है, बल्कि सुशासन और जनता के प्रति जवाबदेही का भी एक मूल सिद्धांत है।
