वरिष्ठ पत्रकार को ढाबे पर दी धमकी, पुलिस ने कराया बचाव
मीरजापुर में शुक्ला ढाबा पर रविवार शाम वरिष्ठ पत्रकार शशि भूषण दूबे को अधिवक्ता वीरेंद्र गिरि और साथियों ने कथित तौर पर धमकाया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर पत्रकार को सुरक्षित घर भेजा। डीएम-एसपी से सुरक्षा की मांग की गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | मीरजापुर | 30 अगस्त 2026
लाल
पत्रकार शशि भूषण दूबे के अनुसार, वह रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे शुक्ला ढाबा पर बैठकर पुलिस विभाग से जारी दो प्रेस विज्ञप्तियों से संबंधित क्राइम समाचार की कवरेज कर रहे थे। इसी दौरान अधिवक्ता वीरेंद्र गिरि कथित रूप से अपने तीन साथियों के साथ वहां पहुंचे। पत्रकार का आरोप है कि अधिवक्ता ने उनके साथ न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। विवाद बढ़ने पर ढाबा संचालक कुनाल त्रिपाठी और उनके कर्मचारियों ने भी बीच-बचाव का प्रयास किया। इसी बीच 112 पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिसकर्मियों ने पत्रकार और उनके पुत्रों राजीव रंजन व रोमेश रंजन को सुरक्षित घर पहुंचाया।
पूर्व विवाद के चलते कथित धमकी का आरोप
पत्रकार शशि भूषण दूबे ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिवक्ता पूर्व में उनके महाविद्यालय में तदर्थ शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसी नियुक्ति और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा है। पत्रकार का कहना है कि इसी विवाद के चलते उन पर कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर पर भी धमकी देने की कोशिश की गई थी।
पत्रकार ने संबंधित अधिवक्ता के आचरण को लेकर बार काउंसिल के नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। इसके अतिरिक्त, तदर्थ शिक्षक के रूप में नियुक्ति की अवधि के दौरान न्यायालय में वकालत किए जाने से संबंधित आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन विशिष्ट आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
सुरक्षा की मांग, जांच की स्थिति अस्पष्ट
पत्रकार ने इस घटना के संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पत्रकार का कहना है कि इन कथित धमकियों के चलते उनके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है। मामले में पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई है और आरोपों की जांच की वर्तमान स्थिति क्या है, इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है। पुलिस जांच और दोनों पक्षों के बयान दर्ज होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
