वाराणसी में उफनती गंगा: 40 से अधिक घाट जलमग्न, नाव संचालन पर रोक
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से 40 से अधिक घाट जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन ने नाव संचालन पर रोक लगा दी है और गंगा आरती भी सुरक्षित स्थान पर हो रही है।

द क्लिफ न्यूज़ | वाराणसी | 17 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण शहर के 40 से अधिक घाट जलमग्न हो गए हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन ने नदी में सभी प्रकार के नाव संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उफनती गंगा के कारण प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट सहित कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह डूब गई हैं, जिससे आम जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ा है।
गंगा नदी में जलस्तर में करीब 6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटों में जलस्तर में हुई यह तीव्र बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है। इस स्थिति के मद्देनजर, प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है और नागरिकों से नदी किनारे अनावश्यक रूप से न जाने तथा जलमग्न सीढ़ियों का प्रयोग न करने की अपील की है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
धार्मिक स्थलों और गतिविधियों पर गहरा असर
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सीधा प्रभाव शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी दिख रहा है। मणिकर्णिका घाट पर, जहां अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं होती हैं, जलमग्न सीढ़ियों के कारण व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रशासन को आपातकालीन तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ सकता है।
वाराणसी की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, दशाश्वमेध घाट पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती भी इस बार प्रभावित हुई है। गंगा का पानी आरती स्थल की निचली सीढ़ियों तक पहुंच जाने के कारण, आरती को सुरक्षित ऊपरी सीढ़ियों पर या किसी अन्य निर्धारित सुरक्षित स्थान पर आयोजित किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए धार्मिक परंपरा को जारी रखा जा सके। गंगा आरती देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच भीड़ नियंत्रण एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। प्रशासन ने नदी के बहुत करीब जाने से रोकने के लिए विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की है।
इसके अतिरिक्त, काशी विश्वनाथ मंदिर के गंगा द्वार की ओर जाने वाला संपर्क मार्ग भी जलस्तर में वृद्धि से प्रभावित हुआ है। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और मंदिर क्षेत्र में आने वाले दर्शनार्थियों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
सुरक्षा के लिए नाव संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध
बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के मद्देनजर, प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए नदी में छोटी-बड़ी सभी नावों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। वाराणसी में गंगा की नाव यात्रा एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है, और इस प्रतिबंध का सीधा असर पर्यटकों के अनुभव के साथ-साथ स्थानीय नाविकों की आजीविका पर भी पड़ेगा। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन किया जाए।
आपदा प्रबंधन की तैयारियां सक्रिय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और जल पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की टीमें लगातार घाटों और नदी के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त कर रही हैं और जलस्तर में होने वाले किसी भी बदलाव पर बारीकी से नजर रख रही हैं।
घाटों के आसपास रहने वाले नागरिकों के लिए भी यह जलवृद्धि चिंता का कारण है। यदि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा, तो निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रारंभिक तैयारी भी कर रहा है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर के पीछे ऊपरी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश और नदी में बढ़े जलप्रवाह जैसे कारण महत्वपूर्ण हो सकते हैं। आगामी घंटों में जलस्तर में होने वाली वृद्धि की दर आगे की स्थिति को निर्धारित करेगी। प्रशासन द्वारा नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और नदी के किनारे तथा जलमग्न क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
