वैश्विक संघर्षों के बीच भारत 'विश्व मित्र' की भूमिका में, जयशंकर की कूटनीति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन-पोलैंड यात्रा के दौरान युद्ध समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाधान कूटनीति से निकलेगा, युद्ध से नहीं।

संवाददाता: शाश्वत तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 7 सितंबर 2026
दुनिया के दो प्रमुख संघर्षों - रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव - के बीच भारत ने वैश्विक कूटनीति में अपनी सक्रिय भूमिका को और मजबूत किया है। हाल ही में, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की यूक्रेन और पोलैंड की तीन दिवसीय यात्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल मूकदर्शक नहीं, बल्कि 'विश्व मित्र' के रूप में समाधान का मार्ग प्रशस्त करने का प्रयास कर रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति व स्थिरता की वकालत करना रहा है।
यूक्रेन की राजधानी कीव में अपने समकक्ष आंद्री सिबिहा के साथ सीधी बातचीत में, डॉ. जयशंकर ने यूक्रेन युद्ध के विनाशकारी परिणामों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस संघर्ष का प्रभाव केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों में, ईंधन, खाद्य और उर्वरक संकट के रूप में गंभीर रूप से महसूस किया जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि उनकी यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह यात्रा यूक्रेन में 2022 से जारी युद्ध के व्यापक संदर्भ में हो रही है।
युद्ध को समाप्त करने पर भारत का पुरजोर जोर
विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का मानना है कि यह युद्ध का दौर नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकते। उन्होंने हाल ही में बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि 'अंतहीन युद्ध की जगह युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए'। जयशंकर ने कहा कि संघर्ष के हर बीतते दिन के साथ मौतें और तबाही बढ़ रही है, और इसका रास्ता संबंधित पक्षों को स्वयं खोजना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भारत किसी भी तरह से शांति स्थापना में योगदान दे सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है, और यही उनकी यूक्रेनी समकक्ष के साथ बातचीत का मुख्य बिंदु था।
पोलैंड के साथ मजबूत होते रिश्ते और कूटनीतिक प्रयास
यूक्रेन के बाद, डॉ. जयशंकर पोलैंड पहुंचे, जहाँ उन्होंने उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर चर्चा की। इस मुलाकात में भी यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के मुद्दे पर विशेष जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि अंतहीन युद्ध के बजाय युद्ध को समाप्त करने का प्रयास किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे संघर्षों में कोई भी पक्ष विजयी नहीं होता। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए दूसरों द्वारा किए जा रहे प्रयासों का समर्थन किया जाना चाहिए, और भारत इसी दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
'विश्व मित्र' के रूप में भारत की भूमिका
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की वकालत की है। मानवीय सहायता के तौर पर, भारत ने अब तक यूक्रेन को 19 खेपों में 160 टन से अधिक आवश्यक सामग्री भेजी है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जहाँ एक ओर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर रूस-यूक्रेन संघर्ष अभी भी जारी है, ऐसे नाजुक समय में डॉ. जयशंकर की यह यात्रा भारत की 'विश्व मित्र' के रूप में उभरती भूमिका को रेखांकित करती है। यह दर्शाता है कि भारत केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में एक सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है।
यात्रा के दौरान, दोनों देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ, भारत ने कूटनीति और संवाद के माध्यम से अस्थिरता को कम करने के अपने दृष्टिकोण को एक बार फिर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत, भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच, एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तत्पर है।
यह स्थिति, जहाँ वैश्विक शक्ति संतुलन लगातार बदल रहा है और प्रमुख राष्ट्र विभिन्न भू-राजनीतिक गुटों में बंटते दिख रहे हैं, भारत के लिए एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करती है। भारत अपनी 'गुटनिरपेक्ष' विदेश नीति की जड़ों को मजबूत करते हुए, विभिन्न पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। यूक्रेन के प्रति भारत का रुख, जो रूस के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद, मानवीय सहायता और शांति की वकालत पर केंद्रित है, इस जटिल वैश्विक समीकरण में उसकी कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।
विदेश मंत्री जयशंकर की यात्राओं का महत्व इस तथ्य में निहित है कि ये यात्राएं वर्तमान वैश्विक विमर्श के बिल्कुल केंद्र में घटित हुई हैं। जब दुनिया युद्ध के खतरों और विनाशकारी परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से देख रही है, ऐसे में भारत का शांति और संवाद का संदेश अधिक प्रासंगिक हो जाता है। ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करके, भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह उन राष्ट्रों की आवाज बनने का प्रयास कर रहा है जो अक्सर बड़े भू-राजनीतिक संघर्षों के हाशिये पर धकेल दिए जाते हैं।
यूक्रेन के साथ, भारत ने मानवीय सहायता को एक प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया है, जो राष्ट्रों के बीच सहानुभूति और सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है। 160 टन से अधिक की 19 खेपों में भेजी गई सहायता, युद्ध से प्रभावित आबादी के लिए राहत का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह कार्य केवल दान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारत की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है जो वह वैश्विक समुदायों के प्रति निभाता है, विशेष रूप से संकट के समय में।
पोलैंड के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की चर्चा, युद्ध के बावजूद, सामान्य कूटनीतिक और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करती है। यह एक संतुलित दृष्टिकोण है, जहाँ भारत सुरक्षा और स्थिरता की वकालत करते हुए, अपने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक आर्थिक सहयोग को भी आगे बढ़ा रहा है। उप-प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ बैठकें इस बात का प्रमाण हैं कि कूटनीति तब भी जीवित रह सकती है जब हथियार अभी भी बोल रहे हों।
कुल मिलाकर, डॉ. जयशंकर की यह यात्रा एक 'मूकदर्शक' से 'मार्गदर्शक' बनने की भारत की उभरती भूमिका का एक स्पष्ट उदाहरण है। यह यात्रा न केवल भारत की कूटनीतिक कुशलता का प्रदर्शन करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक राष्ट्र, वैश्विक अशांति के बीच, शांति, स्थिरता और संवाद की अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से बनाए रख सकता है। भारत का 'विश्व मित्र' स्वरूप, केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक सक्रिय कूटनीतिक रणनीति है, जो वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
