वैश्विक बैंकिंग में शीर्ष 5 में भारतीय बैंक: PSB कॉन्फ्लुएंस 2026 में रणनीति पर मंथन
नई दिल्ली में 17-18 अगस्त, 2026 को आयोजित दो दिवसीय PSB कॉन्फ्लुएंस 2026 में भारतीय बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने की रणनीति पर शीर्ष नेतृत्व मंथन करेगा।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के बैंकिंग क्षेत्र के लिए निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्य – दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में कम से कम एक भारतीय बैंक को शामिल करना – को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग (DFS) नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026’ का आयोजन कर रहा है। यह सम्मेलन 17 और 18 अगस्त 2026 को आयोजित किया जाएगा, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के लगभग 125 शीर्ष नेतृत्वकर्ता एवं वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनाने के लिए ठोस रणनीतियों को अंतिम रूप देना है।
भारत, विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के नाते, अपने बैंकिंग क्षेत्र से वैश्विक मंच पर एक बड़ी भूमिका निभाने की अपेक्षा रखता है। PSB Confluence 2026 इसी अपेक्षा को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की क्षमता, पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक ताकत को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श का एक मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन इस बात पर गहन मंथन करेगा कि भारतीय बैंक अपनी वित्तीय क्षमता और तकनीकी दक्षता को कैसे बढ़ा सकते हैं, ताकि वे वैश्विक बैंकिंग क्षेत्र में अपनी एक सशक्त पहचान स्थापित कर सकें।
जमा जुटाना: बैंकिंग की मजबूती का आधार
सम्मेलन के प्रमुख एजेंडों में से एक ‘डिपॉजिट मोबिलाइजेशन’ यानी जमा जुटाना होगा। एक पर्याप्त और स्थिर जमा आधार किसी भी बैंकिंग व्यवस्था की रीढ़ होता है, जो उसकी ऋण देने की क्षमता को बढ़ाता है और आर्थिक गतिविधियों को वित्तीय समर्थन प्रदान करता है। इस सम्मेलन में बैंकों के मौजूदा ग्राहक आधार को मजबूत करने, नए ग्राहकों को जोड़ने तथा लोगों में बैंकिंग और बचत के प्रति विश्वास को बढ़ाने वाली रणनीतियों पर विचार-विमर्श होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही, डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते चलन और ग्राहकों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप, जमा उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
युवाओं पर विशेष ध्यान: भविष्य के ग्राहक
भारत की विशाल युवा आबादी को देखते हुए, सम्मेलन में युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ, उपयोगी और उनकी विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप बनाने पर भी महत्वपूर्ण चर्चाएं होंगी। युवा वर्ग वर्तमान में डिजिटल तकनीक का सबसे अधिक उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं में से है। इसलिए, बैंकिंग सेवाओं को सरल, तेज और तकनीक-संचालित बनाने के साथ-साथ, युवाओं की शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, निवेश और अन्य वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले नए उत्पादों के विकास पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। युवाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने का उद्देश्य केवल ग्राहक संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का एक सक्रिय हिस्सा बनाना भी है, जो देश के वित्तीय समावेशन को और मजबूत करेगा।
निवेश चक्र को गति देना: आर्थिक विकास की कुंजी
सम्मेलन के दौरान देश के निवेश चक्र को गतिशील बनाने की रणनीतियों पर भी व्यापक विमर्श किया जाएगा। आर्थिक विकास को गति देने के लिए बैंकों की ऋण देने की क्षमता और निवेश के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बुनियादी ढांचे, उद्योगों, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), रोजगार सृजन और विभिन्न विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस संदर्भ में, बैंकिंग क्षेत्र की रणनीतियों को देश की व्यापक आर्थिक आवश्यकताओं के साथ गहराई से जोड़ने पर चर्चा होगी। इसका लक्ष्य एक ऐसा वित्तीय वातावरण तैयार करना है, जहाँ उत्पादक क्षेत्रों को समय पर और पर्याप्त ऋण मिल सके, जिससे निवेश गतिविधियों को निरंतर गति मिलती रहे।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स: वैश्विक प्रतिस्पर्धा की ओर
PSB Confluence 2026 के एजेंडे में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) एक और महत्वपूर्ण विषय है। वैश्विक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच, तकनीक, विशेषज्ञता, डेटा प्रबंधन और आधुनिक वित्तीय सेवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारतीय बैंकों की वैश्विक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए GCCs से जुड़े अवसरों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारतीय बैंकिंग संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी और व्यावसायिक दक्षता से सुसज्जित करना है, ताकि वे वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत कर सकें।
भविष्य की दिशा तय करेगा सम्मेलन
यह दो दिवसीय सम्मेलन केवल एक विचार-विमर्श कार्यक्रम मात्र नहीं है, बल्कि इसे भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग तंत्र के भविष्य की दिशा तय करने वाले एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। इसका व्यापक उद्देश्य बैंकों को अधिक ग्राहक-केंद्रित, तकनीक-सक्षम, वित्तीय रूप से सुदृढ़ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। प्रधानमंत्री के ‘दुनिया के शीर्ष पांच में एक भारतीय बैंक’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, भारतीय बैंकों को आकार, दक्षता, तकनीक, पूंजी, ग्राहक सेवा और वैश्विक पहुंच – प्रत्येक स्तर पर अपनी क्षमता को बढ़ाना होगा। नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन इसी व्यापक लक्ष्य की दिशा में रणनीतिक सोच और कार्ययोजना तैयार करने का एक अनमोल अवसर प्रदान करेगा। सम्मेलन में होने वाला गहन विमर्श आने वाले वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कार्यप्रणाली, ग्राहक सेवाओं, ऋण विस्तार, जमा जुटाने की क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उनकी भूमिका को एक नई और सुदृढ़ दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
