उतरौला तहसील में ऑनलाइन दाखिल-खारिज का विरोध, न्यायिक कार्य ठप
बलरामपुर के उतरौला तहसील में ऑनलाइन दाखिल-खारिज व्यवस्था के खिलाफ अधिवक्ताओं ने अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। व्यवस्था के विरोध में न्यायिक कार्य...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 13 अक्टूबर 2026
बलरामपुर जिले की उतरौला तहसील में ऑनलाइन दाखिल-खारिज की नई व्यवस्था के खिलाफ अधिवक्ता संघ ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन की शुरुआत की है। इस आंदोलन के पहले दिन करीब 40 अधिवक्ताओं ने अनशन पर बैठकर अपनी मांगों के प्रति आवाज उठाई। अधिवक्ताओं के इस सामूहिक विरोध के कारण तहसील के सभी न्यायालयों में न्यायिक कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। सुनवाई न होने के कारण दूर-दराज से आए अनेक वादकारियों को बिना किसी समाधान के मायूस होकर लौटना पड़ा।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज व्यवस्था के विरोध के चलते न केवल न्यायिक कार्य बल्कि तहसील से जुड़े अन्य प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हुए हैं। तहसील में स्थित रजिस्ट्री कार्यालय का संचालन भी पूरी तरह से प्रभावित रहा। पूरे दिन एक भी बैनामे का पंजीकरण नहीं हो सका, जिससे सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नोटरी स्टाम्प की बिक्री भी बंद होने से सुहेल अहमद, जुबेर खान और शिव शंकर जैसे कई आम नागरिकों को सरकारी दस्तावेजों के लिए भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और मांगे
अधिवक्ता संघ ने तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का दावा है कि सीमांकन से जुड़े मामलों में कानूनगो और लेखपालों द्वारा कथित तौर पर 20 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की मांग की जा रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह की प्रथाओं से सीधे तौर पर आम जनता का शोषण हो रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इन गंभीर आरोपों पर मौन साधे हुए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव और महामंत्री रवि शंकर मिश्र ने बताया कि विरोध स्वरूप आगामी बुधवार को एक विशाल मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया जाएगा। यह रैली तहसील परिसर से शुरू होकर मुख्य बाजार होते हुए वापस तहसील परिसर में आकर संपन्न होगी। महामंत्री रवि शंकर मिश्र ने इस आंदोलन को 'आर-पार की लड़ाई' बताते हुए कहा कि जब तक अधिकारियों द्वारा थोपी गई ऑनलाइन व्यवस्था को वापस नहीं लिया जाता और अधिवक्ताओं की मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन में अधिवक्ताओं की उपस्थिति
आंदोलन के पहले दिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं में कृष्ण गोपाल सिंह, शिव रतन लाल, राम प्रताप चौधरी, राम सुंदर यादव, सुशील श्रीवास्तव, शत्रुघ्न लाल मिश्र, राम तीरथ जायसवाल, अखिल श्रीवास्तव, सुमित कुमार, नवनीत श्रीवास्तव, हनुमान प्रसाद, राजवीर सिंह, अतुल यादव, मुकेश कश्यप, मनीष यादव, शक्ति मिश्र, रघुनाथ वर्मा और सभाजीत तिवारी सहित कई सदस्य अनशन स्थल पर उपस्थित रहे। इनके साथ ही गिरीश पांडे, आरके पांडेय, व्यासमुनि पांडेय, अमरनाथ शर्मा, तुलसीराम यादव, राधेश्याम यादव, निजामुद्दीन अंसारी, शहबाज फजल, आरिफ खान, राकेश कुमार, मुकेश कुमार, संजय चौधरी, आयशा, फैजान खान, प्रवेश गुप्ता, आलोक कुमार, विजय बहादुर जायसवाल, दिनकर श्रीवास्तव, मनीष पांडे, रश्मि सिंह, श्वेता सिंह, विनीश गुप्ता, सुभाष वर्मा, संदीप गुप्ता, संतराम वर्मा और रामचंद्र गुप्ता जैसे अन्य अधिवक्ताओं ने भी अपना समर्थन दिया। अधिवक्ताओं ने कहा कि उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन मांगों के समाधान हेतु धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है, जो उनके आंदोलन को और मुखर बनाएगा।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था को अधिवक्ताओं द्वारा अनुचित और अव्यवहारिक बताया जा रहा है। उनका तर्क है कि इस नई प्रणाली के कारण भूमि संबंधी विवादों के निपटारे में अत्यधिक देरी हो रही है। खासकर, सीमांकन के मामलों में जहां भौतिक सत्यापन और स्थलीय निरीक्षण की आवश्यकता होती है, वहां ऑनलाइन प्रक्रियाएं पर्याप्त नहीं हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि मैनुअल प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुगमता अधिक थी, जबकि ऑनलाइन प्रणाली में तकनीकी खामियां और जटिलताएं हैं, जो आम जनता के लिए और भी अधिक परेशानी का सबब बन रही हैं।
इस व्यवस्था के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार की आशंकाओं ने अधिवक्ताओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। उनके अनुसार, लेखपाल और कानूनगो जैसे राजस्व कर्मचारी इस नई प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे हैं और विभिन्न प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल आम लोगों को आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रही है, बल्कि न्यायिक प्रणाली में विश्वास को भी कमजोर कर रही है। अधिवक्ताओं की मांग है कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रणाली को पूरी तरह से स्थगित किया जाए और पूर्व की प्रभावी व्यवस्था को बहाल किया जाए, साथ ही भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए।
तहसील परिसर में जारी क्रमिक अनशन के माध्यम से अधिवक्ता संघ ने प्रशासन को अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। उनका यह आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक संघर्ष का प्रतीक है जो न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार और भ्रष्टाचार के उन्मूलन की मांग करता है। जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जाता और उनका समाधान नहीं होता, तब तक अधिवक्ता अपना आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बुधवार को होने वाली मोटरसाइकिल रैली इस आंदोलन को और अधिक जन-समर्थन दिलाने और प्रशासनिक दबाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
क्षेत्रीय जनता भी अधिवक्ताओं के आंदोलन का समर्थन कर रही है, क्योंकि वे भी ऑनलाइन दाखिल-खारिज प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से जूझ रहे हैं। सुहेल अहमद, जुबेर खान और शिव शंकर जैसे कई नागरिकों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेजों को प्राप्त करने के लिए उन्हें अनावश्यक देरी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उनकी मानें तो, यह ऑनलाइन प्रणाली अपनी प्रारंभिक अवस्था में ही अव्यवहारिक साबित हो रही है और इसे जल्द से जल्द सुधारा जाना चाहिए या फिर पुरानी व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए।
