उप निरीक्षक भरतलाल प्रजापति को 'उत्कृष्टता इन साइबर पुलिसिंग' राष्ट्रीय पुरस्कार
भोपाल साइबर क्राइम के उप निरीक्षक भरतलाल प्रजापति को नई दिल्ली में 'FCRF एक्सीलेंस अवार्ड 2026' से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार 'इन्वेस्टिगेशन कैंप' पहल के लिए दिया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 9 अगस्त 2026
साइबर अपराधों से निपटने की दिशा में मध्य प्रदेश पुलिस के नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण पहचान मिली है। भोपाल साइबर क्राइम में पदस्थ उप निरीक्षक भरतलाल प्रजापति को नई दिल्ली में आयोजित 'फ्यूचरक्राइम समिट 2026' के दौरान 'FCRF एक्सीलेंस अवार्ड 2026 – एक्सीलेंस इन साइबर पुलिसिंग' से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें 'इन्वेस्टिगेशन कैंप' के विकास और साइबर पुलिसिंग तथा डिजिटल जांच में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के लिए प्रदान किया गया है।
यह सम्मान नई दिल्ली के भारत मंडपम में 6 और 7 अगस्त 2026 को आयोजित FutureCrime Summit 2026 के मंच पर Future Crime Research Foundation (FCRF) द्वारा दिया गया। यह समिट साइबर खतरों पर चर्चा करने और उनसे निपटने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें बहु-हितधारक सहभागिता, नीतिगत संवाद और क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाता है।
साइबर जांच में तकनीकी समाधानों का विकास
उप निरीक्षक भरतलाल प्रजापति को यह पुरस्कार 'इन्वेस्टिगेशन कैंप' नामक एक ऐसी पहल के लिए मिला है, जिसका उद्देश्य वास्तविक जांच के दौरान आने वाली तकनीकी चुनौतियों को समझना और उनके लिए व्यावहारिक, तकनीक-आधारित समाधान विकसित करना है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य जांच अधिकारियों को ऐसे उपकरण और तरीके प्रदान करना है, जिनका उपयोग वे जमीनी स्तर पर साइबर और डिजिटल अपराधों की जांच को अधिक व्यवस्थित, त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए कर सकें।
साइबर अपराधों की जांच में डिजिटल साक्ष्य, तकनीकी विश्लेषण और विभिन्न डिजिटल माध्यमों से प्राप्त जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। 'इन्वेस्टिगेशन कैंप' इन जटिलताओं को दूर करने और जांच प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए केंद्रित है। मध्य प्रदेश पुलिस का यह प्रयास दर्शाता है कि वे बदलती प्रौद्योगिकी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने और अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जनजागरूकता और त्वरित रिपोर्टिंग पर पुलिस का जोर
मध्य प्रदेश पुलिस साइबर अपराध से बचाव के लिए रोकथाम, जनजागरूकता, त्वरित रिपोर्टिंग और प्रभावी तकनीकी जांच जैसे बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रही है। इस दिशा में, नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी लिंक्स, डिजिटल गिरफ्तारियों और अन्य साइबर खतरों के बारे में शिक्षित करने के लिए 'सेफ क्लिक' और 'सेफ क्लिक 2.0' जैसे अभियान चलाए गए हैं। वर्ष 2025 में 'सेफ क्लिक' अभियान शुरू किया गया था, जिसके क्रम को आगे बढ़ाते हुए 2026 में 'सेफ क्लिक 2.0' का संचालन किया गया। इन अभियानों का उद्देश्य नागरिकों, छात्रों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और विभिन्न वर्गों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
साइबर अपराधों की शिकायतें दर्ज कराने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के उद्देश्य से ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) जैसी पहलों की शुरुआत की गई है। यह प्रणाली नागरिकों को डिजिटल माध्यम से प्रारंभिक शिकायतें दर्ज करने की सुविधा प्रदान करती है, और इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत कानूनी मान्यता प्राप्त है। इस प्रणाली का लक्ष्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से नागरिकों को पुलिस सेवाओं से अधिक सुगमता से जोड़ना और साइबर अपराधों की सूचना एवं कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है।
तकनीक-संचालित पुलिसिंग की बढ़ती आवश्यकता
साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों और तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके कारण पुलिसिंग को भी निरंतर विकसित होना पड़ रहा है। पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ, मध्य प्रदेश पुलिस तकनीक, डिजिटल फोरेंसिक, डेटा विश्लेषण, साइबर इंटेलिजेंस और नवाचार के माध्यम से अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ा रही है। यह राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि न होकर, वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और साइबर क्राइम टीम के सामूहिक प्रयासों की राष्ट्रीय मंच पर मिली स्वीकार्यता का प्रतीक है।
पुलिस का निरंतर प्रयास है कि नागरिक साइबर अपराध का शिकार होने से पहले ही सतर्क रहें। यदि अपराध घटित हो भी जाता है, तो वे बिना किसी देरी के पुलिस तक पहुंचें। इसी उद्देश्य के साथ, जनजागरूकता अभियानों को तेज करने के साथ-साथ, साइबर अपराधों की जांच और कार्रवाई की क्षमता को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। FutureCrime Summit जैसे आयोजन पुलिस और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक साथ लाकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की रणनीतियों पर मंथन करने का अवसर प्रदान करते हैं।
