उज्जैन: महाकाल के द्वार पर श्रद्धालुओं से मारपीट, गृह मंत्रालय अधिकारी का परिवार पीड़ित
उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में प्रसाद खरीदने को लेकर हुए विवाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के परिवार से कथित मारपीट और धक्का-मुक्की का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

द क्लिफ न्यूज़ | उज्जैन | 3 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में महाकालेश्वर मंदिर के समीप फूल-प्रसाद विक्रेताओं की कथित दबंगई का एक और मामला सामने आया है, जिसने आस्था के इस पवित्र स्थल पर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार को ग्वालियर से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आए केंद्रीय गृह मंत्रालय में पदस्थ सीनियर अकाउंटेंट योगेश साहू और उनके परिवार के साथ प्रसाद खरीदने को लेकर विवाद के बाद मारपीट का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने दुकान संचालकों पर प्रसाद खरीदने के लिए दबाव बनाने, विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया है। इस घटना में परिवार की महिलाओं सहित कई सदस्यों को चोटें आई हैं। पुलिस ने एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
योगेश साहू ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपनी पत्नी नेहा कुमारी, पिता ओमप्रकाश साहू और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आए थे। मंदिर की ओर जाते समय भारत माता मंदिर के पास एक फूल-प्रसाद की दुकान संचालक ने उन्हें रोककर सामान दुकान पर रखने की बात कही। सामान रखने के बाद, जब परिवार प्रसाद की टोकरी लेकर आगे बढ़ा, तो कथित तौर पर दुकानदार ने परिवार में लोगों की संख्या के हिसाब से अधिक प्रसाद खरीदने का दबाव बनाया। परिवार द्वारा इतनी मात्रा में प्रसाद खरीदने से इनकार करने पर विवाद उत्पन्न हो गया।
प्रसाद की कीमत को लेकर हुआ विवाद
शिकायत के अनुसार, शुरुआत में उन्हें लगभग 100 रुपये की प्रसाद की टोकरी देने की बात कही गई थी। लेकिन बाद में दुकानदार ने कहा कि परिवार में छह लोग होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति के लिए लगभग 350 रुपये की प्रसाद की टोकरी लेनी होगी। योगेश साहू ने इतनी महंगी टोकरी खरीदने से मना कर दिया, जिसके बाद कहासुनी शुरू हो गई। परिवार का आरोप है कि इसी बात पर दुकान संचालक और उसके साथियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट शुरू कर दी। योगेश साहू के सिर में चोट लगने की बात कही जा रही है, वहीं उनकी रिश्तेदार अंकिता कोहनी में चोटिल हुई हैं।
महिलाओं से धक्का-मुक्की का आरोप, गर्भवती पत्नी भी शामिल
विवाद के दौरान महिलाओं से भी धक्का-मुक्की का आरोप लगा है। योगेश साहू की पत्नी नेहा कुमारी, जिन्हें रिपोर्टों में गर्भवती बताया गया है, उनके साथ भी धक्का-मुक्की की गई। अचानक हुई इस घटना से परिवार में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना के दौरान एक युवक सरिया लेकर मारने के लिए दौड़ा। किसी तरह परिवार वहां से निकलकर महाकाल थाने पहुंचा और घटना की पूरी जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई।
थाने से चंद कदमों की दूरी पर हुई घटना
इस घटना की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि यह महाकाल थाने से मात्र 200 मीटर की दूरी पर घटित हुई। यह वह क्षेत्र है जहां श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए पुलिस की मौजूदगी आमतौर पर बनी रहती है। इस घटना ने एक बार फिर मंदिर क्षेत्र में फूल-प्रसाद की दुकानों के संचालन और विक्रेताओं के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने एक आरोपी को किया गिरफ्तार
शिकायत मिलने के तुरंत बाद महाकाल थाना पुलिस हरकत में आई और कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी संजू उर्फ जयराज को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में एक नाबालिग साथी को भी हिरासत में लिया गया है और अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी को मंदिर क्षेत्र में घुमाए जाने और कान पकड़कर उठक-बैठक लगवाने की बातें भी सामने आई हैं।
पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले
महाकालेश्वर मंदिर और उज्जैन के अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास फूल-प्रसाद विक्रेताओं के व्यवहार को लेकर पूर्व में भी कई विवाद सामने आ चुके हैं। श्रद्धालुओं को अपनी दुकान से ही प्रसाद खरीदने के लिए मजबूर करना, निर्धारित स्थान से हटकर दुकानें लगाना, अधिक कीमत वसूलना और विरोध करने पर विवाद की स्थिति निर्मित करना प्रशासन के लिए एक चुनौती बना हुआ है। धार्मिक नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं से स्थानीय दुकानदार सुविधा और आतिथ्य की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में यदि पूजा सामग्री बेचने वाले ही श्रद्धालुओं से विवाद और मारपीट पर उतर आएं, तो यह न केवल पीड़ित परिवार पर, बल्कि पूरे शहर की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
आस्था के नाम पर मनमानी पर अंकुश आवश्यक
फूल, माला और प्रसाद श्रद्धालुओं की आस्था का अभिन्न अंग हैं। इनके कारोबार से हजारों लोगों की आजीविका भी जुड़ी है, इसलिए पूरे कारोबारी वर्ग को दोष देना उचित नहीं है। हालांकि, कुछ लोगों द्वारा की जा रही दबंगई और मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाना नितांत आवश्यक है। मंदिर क्षेत्र में दुकान लगाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्पष्ट नियम, निर्धारित स्थान, मूल्य सूची और पहचान की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रद्धालु अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार प्रसाद खरीदें और उन पर किसी भी दुकान से खरीदारी के लिए कोई दबाव न बनाया जाए।
उज्जैन की पहचान केवल महाकालेश्वर मंदिर से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध धार्मिक संस्कृति, अतिथि-सत्कार और आध्यात्मिक वातावरण से है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु यहां से उज्जैन की एक सकारात्मक छवि लेकर लौटते हैं। ऐसे में, यदि मंदिर के आसपास उनसे मारपीट, अभद्रता या जबरन खरीदारी का दबाव बनाया जाता है, तो यह शहर की धार्मिक प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंचाता है। महाकाल के दरबार में श्रद्धा लेकर आने वाला श्रद्धालु, किसी भी दुकानदार के लिए ग्राहक से पहले एक अतिथि है। यदि फूल-प्रसाद का कारोबार आस्था की सेवा के रूप में विकसित हो, तो उज्जैन की पहचान और मजबूत होगी। लेकिन यदि उसी आस्था के नाम पर दबंगई की जाएगी, तो सवाल केवल दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर उठेंगे।
