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उज्जैन: जलती चिता से मानव अवशेष खाने का वीडियो वायरल, साध्वी गिरफ्तार

उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर काली उर्फ नंद गिरि गिरफ्तार। उन पर जलती चिता से मानव अवशेष निकालकर खाने का आरोप है।

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उज्जैन: जलती चिता से मानव अवशेष खाने का वीडियो वायरल, साध्वी गिरफ्तार

द क्लिफ न्यूज़ | उज्जैन | 2 सितंबर 2026

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में चक्रतीर्थ श्मशान घाट से जुड़ा एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसने धार्मिक समुदायों और स्थानीय लोगों में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। इस वीडियो में खुद को किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बताने वाली काली उर्फ नंद गिरि को जलती चिता के पास तलवार के साथ देखा जा सकता है। वीडियो में उनके द्वारा कथित तौर पर चिता से मानव अवशेष निकालकर खाने का दावा किया गया है। मामला सामने आने के बाद संत समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शिकायत मिलने पर जीवाजीगंज थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए काली उर्फ नंद गिरि को गिरफ्तार कर लिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कथित वीडियो आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट से सामने आया था। इसमें वह चक्रतीर्थ श्मशान घाट के वातावरण में, एक जलती हुई चिता के समीप खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में किए गए दावों और दिखाई दे रहे दृश्यों की परिस्थितियों की पुलिस गहन जांच कर रही है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के तेजी से प्रसारित होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है।

संत समाज में गहरा आक्रोश, धार्मिक भावनाओं के हनन का आरोप

वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद, स्थानीय संतों और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इस घटना के प्रति अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि श्मशान घाट और अंतिम संस्कार से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का एक विशेष सम्मान और मर्यादा होती है। किसी भी शव या मानव अवशेष के साथ इस प्रकार का कथित व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं को गंभीर रूप से आहत करने वाला कृत्य है।

विरोध करने वाले संगठनों ने पुलिस से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले ने जैसे-जैसे तूल पकड़ा, पुलिस ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

आधिकारिक शिकायत के बाद दर्ज हुई एफआईआर, कानूनी धाराओं का उपयोग

स्थानीय सेनापति काल भैरव समिति और विष्णु नाथ द्वारा की गई शिकायत के आधार पर, जीवाजीगंज थाना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (भादंवि) की धारा 301 और आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, भादंवि की धारा 301 विशेष रूप से श्मशान या मानव अवशेषों से जुड़े अपमानजनक कृत्यों से संबंधित है, जो इस मामले की प्रकृति के अनुरूप है। वहीं, आयुध अधिनियम की धारा 25 तलवार जैसे हथियार के अवैध प्रदर्शन या इस्तेमाल से जुड़े आरोपों पर लागू होती है, जो वीडियो में दिखाई देने वाले कथित कृत्य से संबंधित है।

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर किया अदालत में पेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए, जीवाजीगंज थाना पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई की। नगर पुलिस अधीक्षक पुष्पा प्रजापति के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम ने आरोपी काली उर्फ नंद गिरि को गिरफ्तार किया। इसके उपरांत, उन्हें न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की जांच के लिए उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा जा सकता है या कानून के अनुसार अन्य कार्रवाई की जाएगी।

वायरल वीडियो की सत्यता और डिजिटल साक्ष्य की जांच जारी

पुलिस वर्तमान में वायरल हो रहे वीडियो की वास्तविकता, उसके रिकॉर्ड किए जाने की परिस्थितियों और उसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम की गहन जांच कर रही है। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वीडियो कब और किस उद्देश्य से बनाया गया था, और क्या उसमें दिखाई देने वाली वस्तु वास्तव में मानव अवशेष ही थी।

इसके अतिरिक्त, जांच एजेंसियां आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट और वायरल वीडियो से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाल रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह वीडियो मूल रूप से कब अपलोड किया गया था और इसके बाद इसे किस प्रकार विभिन्न प्लेटफार्मों पर प्रसारित किया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक वीडियो में किए गए दावों की सत्यता और घटनाक्रम की पूर्ण पुष्टि नहीं की जा सकती। फिलहाल, गिरफ्तारी और एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला कानूनी जांच के दौर में है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।