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उच्च शिक्षा सचिव बदलीं: दीप्ति गौर मुखर्जी को मिली नई जिम्मेदारी

केंद्र सरकार ने आईएएस अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है। इससे पहले नरेश पाल गंगवार को यह जिम्मेदारी मिली थी।

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उच्च शिक्षा सचिव बदलीं: दीप्ति गौर मुखर्जी को मिली नई जिम्मेदारी

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 12 अगस्त 2026

केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सरकार उच्च शिक्षा क्षेत्र में नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन, संस्थानों की गुणवत्ता सुधार, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण एजेंडों पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।

दीप्ति गौर मुखर्जी इससे पूर्व कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव के तौर पर कार्यरत थीं। उनके पास केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाने का लंबा प्रशासनिक अनुभव है। यह प्रशासनिक फेरबदल शिक्षा मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर एक और महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जो उच्च शिक्षा क्षेत्र में चल रही पहलों और नीतियों के कार्यान्वयन को नई गति प्रदान कर सकता है।

प्रशासनिक फेरबदल में वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका

नवीनतम प्रशासनिक फेरबदल के तहत, मध्य प्रदेश कैडर के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। दीप्ति गौर मुखर्जी की उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में नियुक्ति के साथ, पल्लवी जैन गोविल को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, वी.एल. कांथा राव को राजभाषा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। यह फेरबदल संकेत देता है कि केंद्र सरकार अनुभवी और सिद्ध प्रशासनिक अधिकारियों को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय महत्व वाले विभागों की बागडोर सौंप रही है।

उच्च शिक्षा सचिव के पद पर दीप्ति गौर मुखर्जी का आगमन ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुआ है जब देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रयासों में जुटा है। यह नीति उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, पहुंच, समानता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उनके नेतृत्व में, उम्मीद की जाती है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के उन्नयन, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन, और डिजिटल शिक्षा के विस्तार जैसी प्राथमिकताओं को बल मिलेगा।

नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन और उच्च शिक्षा की प्राथमिकताएं

उच्च शिक्षा सचिव के रूप में दीप्ति गौर मुखर्जी के समक्ष कई प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना, विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाना, अनुसंधान और नवाचार के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना, और विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना शामिल है।

केंद्र सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को विशेष प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में, 'प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप' (PMRF) जैसी पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन पहलों के माध्यम से मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए आकर्षित किया जाता है। वर्तमान में, इन पहलों से संबंधित आवेदन प्रक्रिया अगस्त 2026 तक जारी है, जो इस बात का संकेत देता है कि इस क्षेत्र में नई नियुक्तियों के बाद भी गति बनी रहेगी।

शीर्ष स्तर पर हुआ बदलाव

यह उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा सचिव के पद पर यह बदलाव हाल ही में हुआ है। इससे पहले, 26 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय की एक आधिकारिक विज्ञप्ति में डॉ. विनीत जोशी को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में एक बैठक में उपस्थित दर्शाया गया था। इसके बाद, हालिया प्रशासनिक फेरबदल में नरेश पाल गंगवार को इस पद की जिम्मेदारी दी गई थी, और अब केंद्र सरकार ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए दीप्ति गौर मुखर्जी को यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है। इन क्रमिक बदलावों से विभाग के शीर्ष नेतृत्व में सक्रियता और नई नियुक्तियों का दौर जारी है।

दीप्ति गौर मुखर्जी, अपने व्यापक प्रशासनिक अनुभव के साथ, उच्च शिक्षा विभाग में नई दिशा और ऊर्जा लाने की क्षमता रखती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने और भारत को वैश्विक स्तर पर ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके नेतृत्व में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कौन से नए कदम उठाए जाते हैं।