तुलसीपुर में गणेश विसर्जन, डीजे के बजाय ढोल-नगाड़ों की गूंज
बलरामपुर के तुलसीपुर में गणेश पूजनोत्सव का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने भारी बारिश के बीच पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप पर प्रतिमाओं का सिरिया नदी में...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 25 सितंबर 2026
बलरामपुर जिले के तुलसीपुर नगर में पांच दिवसीय श्री गणेश पूजनोत्सव का समापन शुक्रवार को अत्यंत भक्तिपूर्ण एवं पारंपरिक माहौल में हुआ। भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा और देर शाम तक गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से पूरा नगर गूंजता रहा। विभिन्न पूजा पंडालों में स्थापित श्री गणेश की प्रतिमाओं को वाहनों पर भव्य रूप से सजाकर शोभायात्रा निकाली गई, जो अंततः देवीपाटन स्थित सिरिया नदी के तट पर पहुंची, जहाँ प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया गया।
इस वर्ष की गणेश विसर्जन शोभायात्रा की एक विशेष बात यह रही कि आयोजकों द्वारा डीजे साउंड का प्रयोग पूर्णतः वर्जित रखा गया। इसके स्थान पर, पूरे मार्ग पर केवल पारंपरिक ढोल और नगाड़ों की ताल सुनाई दी, जिसने उत्सव को एक अनूठी पहचान दी। श्रद्धालु अबीर-गुलाल उड़ाते हुए और 'अगले बरस तू जल्दी आ' के जयघोष के साथ नाचते-गाते प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक ले गए। महिला, पुरुष और बच्चों ने बारिश में भीगते हुए भी इस आयोजन में पूरी आस्था और उत्साह से सहभागिता की।
सुरक्षा और शांतिपूर्ण व्यवस्था
नदी तट पर पहुंचने के बाद, सभी गणेश प्रतिमाओं का विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया और तत्पश्चात उन्हें सिरिया नदी में विसर्जित कर दिया गया। इस संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान, स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े इंतजाम किए गए थे। नगर के मुख्य मार्गों तथा संवेदनशील माने जाने वाले स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से नियंत्रित करने के साथ-साथ शोभायात्रा को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
प्रशासन के सहयोग और श्रद्धालुओं की ओर से बरती गई अनुशासनप्रियता के चलते, यह पूरा गणेश विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। स्थानीय निवासियों ने इस वर्ष डीजे-मुक्त विसर्जन का हृदय से स्वागत किया और इसे सदियों पुरानी परंपरा के अनुरूप एक सराहनीय कदम बताया। उत्सव के समापन पर, सभी श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष बप्पा के पुनः आगमन की कामना करते हुए विदाई ली।
