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ट्रंप ने किम जोंग उन को बताया 'अच्छा दोस्त', पुरानी तस्वीरें साझा कर रिश्तों की मजबूती का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें 'अच्छा दोस्त' बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं।

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ट्रंप ने किम जोंग उन को बताया 'अच्छा दोस्त', पुरानी तस्वीरें साझा कर रिश्तों की मजबूती का दावा

द क्लिफ न्यूज़ | 18 अगस्त 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को उजागर करते हुए सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों के माध्यम से ट्रंप ने न केवल किम को अपना 'अच्छा दोस्त' बताया है, बल्कि यह भी दावा किया है कि दोनों नेताओं के बीच संबंध मजबूत और बेहतर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, तस्वीरों में भले ही दोनों नेता गंभीर दिख रहे हों, लेकिन उनके बीच व्यक्तिगत स्तर पर आपसी समझ और सम्मान का गहरा रिश्ता रहा है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर 2018 की सिंगापुर शिखर बैठक और बाद में हुई पनमुंजोम मुलाकात की तस्वीरें पोस्ट कीं। ये मुलाकातें उस कूटनीतिक दौर की प्रतीक हैं जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गहन तनाव था, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सीधे संवाद की एक नई शुरुआत हुई थी।

ऐतिहासिक मुलाकातों का स्मरण

डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच पहली ऐतिहासिक शिखर वार्ता जून 2018 में सिंगापुर में संपन्न हुई थी। यह पहली बार था जब किसी तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरियाई नेता के साथ आमने-सामने मुलाकात की हो। इस बैठक में दोनों पक्षों ने कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापित करने और परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

इसके पश्चात, जून 2019 में दोनों नेताओं ने कोरियाई असैन्यीकृत क्षेत्र (डीएमजेड) के पनमुंजोम इलाके में मुलाकात की। इस दौरान ट्रंप ने उत्तर कोरियाई सीमा में कदम रखा, जो दोनों देशों के इतिहास में एक अत्यंत प्रतीकात्मक और असाधारण घटना मानी गई। इन मुलाकातों के माध्यम से ट्रंप ने पारंपरिक कूटनीति से हटकर व्यक्तिगत संबंधों को तनाव कम करने का एक प्रभावी माध्यम बनाने की अपनी नीति का प्रदर्शन किया।

व्यक्तिगत कूटनीति पर ट्रंप का जोर

किम जोंग उन के साथ ट्रंप की कूटनीति अमेरिकी विदेश नीति के पारंपरिक दृष्टिकोण से काफी अलग रही है। शुरुआती दौर में दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी और परमाणु हमले की धमकियों तक का माहौल था, लेकिन बाद में ट्रंप ने सीधे संवाद और व्यक्तिगत संबंधों को तनाव घटाने के साधन के रूप में अपनाया। ट्रंप ने कई अवसरों पर यह भी दावा किया कि किम जोंग उन के साथ उनकी व्यक्तिगत समझ के कारण अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बड़े सैन्य टकराव की आशंका कम हुई। उनका मानना था कि शीर्ष नेताओं के बीच सीधा संवाद अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में सहायक हो सकता है।

दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों पर विवाद

ट्रंप के किम जोंग उन के प्रति इस मैत्रीपूर्ण रुख के बीच, अमेरिका और दक्षिण कोरिया द्वारा आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यासों पर भी चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाएं उत्तर कोरिया से संभावित सैन्य खतरे से निपटने की तैयारी के लिए नियमित रूप से इन अभ्यासों का संचालन करती रही हैं।

अपने कार्यकाल के दौरान, ट्रंप ने इन सैन्य अभ्यासों को अक्सर 'महंगा' और 'उकसावे वाला' बताते हुए उनकी आलोचना की थी। उनके कार्यकाल में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के कुछ प्रमुख संयुक्त सैन्य अभ्यासों को या तो कम कर दिया गया था या कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। ट्रंप का तर्क था कि इससे सैन्य खर्च में कमी आएगी और उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक बातचीत के लिए अधिक अनुकूल माहौल बनेगा। हालांकि, दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान इन अभ्यासों को दोनों देशों की सैन्य तैयारी और समन्वय बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। दूसरी ओर, उत्तर कोरिया इन अभ्यासों को अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखता रहा है और इसकी लगातार निंदा करता रहा है।

उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम: एक अनसुलझी चुनौती

ट्रंप और किम जोंग उन के बीच व्यक्तिगत संबंधों में गर्माहट के बावजूद, उत्तर कोरिया का परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। सिंगापुर वार्ता के बाद परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में अपेक्षित प्रगति हासिल नहीं हो सकी। वर्ष 2019 में हनोई में हुई ट्रंप और किम की दूसरी बड़ी शिखर वार्ता भी बिना किसी व्यापक समझौते के समाप्त हो गई थी। इसके बाद, उत्तर कोरिया ने अपने मिसाइल कार्यक्रम को और आगे बढ़ाया और समय-समय पर बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव का माहौल बना रहा। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

रणनीतिक हितों का टकराव

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और किम जोंग उन के बीच व्यक्तिगत संबंधों की आत्मीयता और अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच मौजूद गहरे रणनीतिक मतभेद दो अलग-अलग पहलू हैं। हालांकि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद बातचीत की संभावना को बढ़ा सकता है, लेकिन परमाणु हथियार, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी अत्यंत जटिल बने हुए हैं।

ट्रंप द्वारा पुरानी तस्वीरें साझा करना यह संकेत देता है कि वह किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संपर्कों को भविष्य की कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। यदि दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत फिर से शुरू होती है, तो व्यक्तिगत संबंधों का उपयोग व्यापक समझौते के लिए राजनीतिक आधार तैयार करने में किया जा सकता है।

दक्षिण कोरिया और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

अमेरिका-उत्तर कोरिया संबंधों में किसी भी प्रकार के बदलाव का सीधा प्रभाव दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा पर पड़ता है। दक्षिण कोरिया अपनी सुरक्षा के लिए काफी हद तक अमेरिकी सैन्य सहयोग पर निर्भर है, जबकि जापान भी उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम को एक गंभीर सुरक्षा चुनौती मानता है। ऐसे में, संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती का कोई भी निर्णय केवल अमेरिका और उत्तर कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका अमेरिका-दक्षिण कोरियाई सैन्य सहयोग, क्षेत्रीय प्रतिरोध क्षमता और उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिका की समग्र रणनीति पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

वर्तमान में, ट्रंप द्वारा किम जोंग उन को 'अच्छा दोस्त' बताया जाना एक राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच वास्तविक संबंधों में स्थायित्व और प्रगति तभी स्पष्ट होगी जब यह व्यक्तिगत संवाद परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा जैसे ठोस मुद्दों पर किसी प्रभावी समझौते में तब्दील होता है।