तीज उत्सव में साधना बनीं 'हरियाली क्वीन', संस्कृति के संरक्षण पर जोर
भोपाल में नारी गौरव संगठन द्वारा आयोजित हरियाली तीज उत्सव में 65 महिलाओं ने भाग लिया। साधना सिन्हा 'हरियाली क्वीन' चुनी गईं, जबकि संस्कृति और परंपराओं पर विशेष जोर दिया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 9 अगस्त 2026
सावन के महीने में उत्सव और उल्लास का माहौल हर तरफ छाया हुआ है। इसी क्रम में भोपाल के मिनाल रेजिडेंसी में नारी गौरव संगठन द्वारा धूमधाम से हरियाली तीज का आयोजन किया गया। इस उत्सव में लगभग 65 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिन्होंने पारंपरिक गीतों, नृत्य और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से पर्व की खुशियां मनाईं। इस वर्ष के आयोजन में जहाँ पारंपरिक उल्लास का संगम था, वहीं भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को समझने और सहेजने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान, तीज पर्व और अन्य भारतीय व्रत-त्योहारों के महत्व पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को हमारी प्राचीन परंपराओं, उनके धार्मिक महत्व और उनसे जुड़े सामाजिक संदेशों से अवगत कराना था, ताकि युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।
'हरियाली क्वीन' प्रतियोगिता ने मोहा मन
हरियाली तीज उत्सव का सबसे आकर्षक पल 'हरियाली क्वीन' प्रतियोगिता रही। इस प्रतियोगिता में, साधना सिन्हा को उनके अनूठे अंदाज़ और पारंपरिक श्रृंगार के लिए 'हरियाली क्वीन' के रूप में ताज पहनाया गया। साधना ने हरे रंग की 35 से अधिक वस्तुएं धारण की थीं, जिनमें पारंपरिक परिधान, पायल और बिछिया तक शामिल थीं। उनके सोलह श्रृंगार और प्रस्तुति ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया।
इसके अतिरिक्त, सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता में भी महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मंजू तोमर, प्रियंका शर्मा और नीलम इस प्रतियोगिता की विजेता रहीं। निर्णायक मंडल में शामिल हेमलता राजपूत और प्रियंका भाटिया ने महिलाओं की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया और उनकी कलात्मकता की सराहना की।
संस्कृति का संरक्षण और नई पीढ़ी का जुड़ाव
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, पार्षद शिरोमणि शर्मा ने सभी महिलाओं को हरियाली तीज की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि तीज जैसे पर्व न केवल उत्सव का अवसर हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का माध्यम भी हैं। पार्षद शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय त्योहारों में केवल आनंद ही नहीं, बल्कि परिवार, प्रकृति, संस्कार और सामाजिक सौहार्द का गहरा संदेश छिपा है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान आधुनिक युग में, ऐसे आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। इनका उद्देश्य हमारी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखना है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि वे अपनी परंपराओं को न केवल संजोए रख रही हैं, बल्कि उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
नारी शक्ति और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव का मंच
नारी गौरव संगठन की संस्थापक, अभिलाषा श्रीवास्तव ने हरियाली तीज के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल महिलाओं के श्रृंगार और उल्लास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, सौभाग्य और पारिवारिक मंगलकामना का प्रतीक है। संगठन का लक्ष्य महिलाओं को उनकी सांस्कृतिक और सनातन परंपराओं से जोड़ना है, साथ ही उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शन के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना है।
अभिलाषा श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से महिलाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं, विचारों का आदान-प्रदान करती हैं, और सबसे महत्वपूर्ण, नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध परंपराओं से परिचित कराती हैं। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं की विजेताओं को पूजा भाटिया द्वारा उपहार वितरित किए गए। सावन के मधुर गीत, जोशीले नृत्य और पारंपरिक गतिविधियों के बीच महिलाओं ने पूरे उत्सव का भरपूर आनंद लिया। मिनाल रेजिडेंसी का पूरा माहौल हरे रंग और भारतीय संस्कृति की जीवंतता से सराबोर था।
नारी गौरव संगठन की संस्थापक अभिलाषा श्रीवास्तव, कविता श्रीवास्तव और आशा राघव ने भविष्य में भी इसी तरह के सांस्कृतिक, सामाजिक और जागरूकता-केंद्रित कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प दोहराया। उनका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और भारतीय परंपराओं की समृद्ध विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है, ताकि महिला सहभागिता के माध्यम से समाज का सर्वांगीण विकास हो सके। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय नारी की सहभागिता और उसकी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इन आयोजनों से महिलाओं को न केवल अपनी पहचान बनाने का मौका मिलता है, बल्कि वे अपनी जिम्मेदारियों और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति भी और अधिक जागरूक होती हैं। संगठन का यह प्रयास सराहनीय है कि वह पारंपरिक त्योहारों के माध्यम से आधुनिक समाज में भी मूल्यों और संस्कारों का संचार कर रहा है।
