थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर किसानों से लूट के आरोप: प्रशासन सख्त, जांच के आदेश
सागर जिले के थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर गुणवत्ताहीन मूंग खरीदने और किसानों को परेशान करने के आरोप लगे हैं। अपर कलेक्टर और एसडीएम ने...

संवाददाता: त्रिवेंद्र जाट
द क्लिफ न्यूज़ | सागर | 13 अगस्त 2026
सागर जिले के केसली ब्लॉक स्थित थावरी सेवा सहकारी समिति के मूंग खरीदी केंद्र पर किसानों द्वारा कथित लूट और व्यवस्था में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसानों का दावा है कि खरीदी केंद्र पर गुणवत्ताहीन, कचरा और मिट्टी मिली मूंग की खरीद की जा रही है, जबकि अच्छी उपज लेकर आने वाले किसानों को गुणवत्ता जांच के नाम पर अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। इस मामले में व्यापारियों और बिचौलियों की सक्रियता पर भी सवाल उठाए गए हैं, साथ ही केंद्र प्रभारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के लिए उन्हें कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस खरीद प्रक्रिया में पाई गई गड़बड़ियों को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी हैरानी जताई जा रही है।
अधिकारियों ने लिया संज्ञान, जांच के निर्देश
किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सागर अपर कलेक्टर अविनाश रावत और केसली एसडीएम राजनंदनी शर्मा ने थावरी मूंग खरीदी केंद्र के मामले में संज्ञान लिया है। अधिकारियों ने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और खरीदी व्यवस्था की विस्तृत जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने कहा, “किसानों द्वारा उठाया गया यह मामला हमारे संज्ञान में आया है। थावरी सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित मूंग खरीदी केंद्र की गहन जांच कराई जाएगी और यदि इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई होगी।” वहीं, केसली एसडीएम राजनंदनी शर्मा ने बताया, “थावरी सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित मूंग खरीदी केंद्र में अनियमितताएं बार-बार सामने आ रही हैं। इस संबंध में देवरी एसडीएम से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
संचालन को लेकर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों और किसानों का आरोप है कि यद्यपि यह मूंग खरीदी केंद्र केसली ब्लॉक के लिए स्वीकृत है, इसका संचालन देवरी ब्लॉक स्थित एक वेयरहाउस में किया जा रहा है। इस अतिरिक्त दूरी के कारण किसानों को अपनी उपज को खरीदी केंद्र तक ले जाने में काफी परेशानी हो रही है। यह भी आरोप लगाया गया है कि समिति प्रबंधक की जगह कुछ अन्य व्यक्ति खरीदी केंद्र पर अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं, और कथित तौर पर दलालों की उपस्थिति बनी रहती है। यदि जांच में समिति प्रबंधक की अनुपस्थिति या किसी अनधिकृत व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसकी भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और यह प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि खरीद केंद्र के संचालन में नियमों का पालन हुआ है या नहीं, तथा किसी अनधिकृत व्यक्ति की भूमिका रही है या नहीं।
केंद्र प्रभारी और संरक्षण के आरोप
किसानों ने थावरी सेवा सहकारी समिति के खरीदी केंद्र प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि खरीद से संबंधित कार्यों में अलग-अलग लोगों की भागीदारी देखी जा रही है। किसानों ने मांग की है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाए कि अधिकृत केंद्र प्रभारी कौन है और खरीद प्रक्रिया में कौन सा अधिकारी, कर्मचारी अथवा कर्मचारी-सदृश व्यक्ति किस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है।
किसानों की मांग है कि यदि जांच में प्रभारी की अनुपस्थिति, दस्तावेजों में गड़बड़ी, गलत तरीके से खरीद, तौल में अनियमितता या कोई अन्य नियमविरुद्ध गतिविधि पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानीय लोगों और किसानों ने कुछ व्यक्तियों को स्थानीय भाजपा नेताओं के संरक्षण प्राप्त होने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों से अभी उनका पक्ष सामने आना बाकी है। प्रशासनिक जांच के नतीजे ही इन आरोपों की सच्चाई को उजागर करेंगे।
पूरी खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग
किसानों ने थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर हुई पूरी खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि खरीदी गई मूंग की गुणवत्ता, किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया, उपज की तौल, भुगतान की व्यवस्था, स्टॉक प्रबंधन, बारदाने की उपलब्धता, खरीद रजिस्टर का अवलोकन, सर्वेयर की रिपोर्ट और केंद्र पर उपस्थित कर्मचारियों व अन्य व्यक्तियों की भूमिका की विस्तार से जांच की जाए।
किसानों का कहना है कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि खरीद केंद्र पर किसी भी व्यापारी या बिचौलिए की कोई भूमिका न हो। वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उनकी मेहनत से उगाई गई उपज का उन्हें उचित मूल्य मिलना उनका अधिकार है और खरीद केंद्रों पर पूरी पारदर्शिता एवं नियमों के अनुसार ही खरीद प्रक्रिया संपन्न होनी चाहिए।
अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। अपर कलेक्टर और एसडीएम द्वारा दिए गए जांच एवं कार्रवाई के आश्वासन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर सामने आए आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।
