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थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर अनियमितताओं के आरोप, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

सागर जिले के केसली ब्लॉक में थावरी सहकारी समिति के मूंग खरीदी केंद्र पर अनियमितताओं की शिकायतें, जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से कतरा रहे हैं।

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थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर अनियमितताओं के आरोप, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

द क्लिफ न्यूज़ | सागर | 8 अगस्त 2026

सागर जिले के देवरी क्षेत्र के केसली ब्लॉक स्थित थावरी सहकारी समिति के मूंग खरीदी केंद्र पर लगातार अनियमितताओं के आरोप लगने और इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई न किए जाने से किसानों में गहरा असंतोष है। किसानों का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और उनकी उपज बेचने में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों ने खरीदी केंद्र पर कथित तौर पर किसानों का आर्थिक नुकसान किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब इस मामले को मीडिया के माध्यम से प्रशासन के संज्ञान में लाया जा चुका है, तो फिर क्यों जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच करने से कतरा रहे हैं। किसानों के अनुसार, यदि शिकायतों में कोई सत्यता नहीं है तो प्रशासन को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

बार-बार खबरों के बावजूद कार्रवाई का अभाव

थावरी खरीदी केंद्र की व्यवस्थाओं और खरीद प्रक्रिया में हो रही कथित गड़बड़ियों को लेकर स्थानीय स्तर पर समाचार पत्रों में लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं। इन खबरों के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है। इससे किसानों का प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर विश्वास कम होता जा रहा है और वे अपनी उपज बेचने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। कई छोटे और सीमांत किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई मूंग को बेचने के लिए अधिकारियों और केंद्र प्रबंधन के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

केंद्र प्रभारी की राजनीतिक पहुंच पर संदेह

क्षेत्र में यह भी चर्चाएं गर्म हैं कि केंद्र प्रभारी की राजनीतिक पहुंच, विशेषकर भाजपा नेताओं से कथित नजदीकी के चलते अधिकारी निष्पक्ष जांच करने से कतरा रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी कथित राजनीतिक संरक्षण के कारण प्रशासन कार्रवाई करने से हिचकिचा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच करे, सभी आरोपों की पड़ताल करे और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव अथवा प्रभाव से मुक्त होकर केवल नियमों के अनुसार कार्रवाई करे।

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों ने अपनी उपज की गुणवत्ता, तौल में अनियमितता, खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता, किसानों को जारी किए जाने वाले दस्तावेजों की सत्यता और भुगतान प्रक्रिया सहित पूरी व्यवस्था की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। वे चाहते हैं कि खरीद केंद्र पर आने वाली मूंग की हर स्तर पर बारीकी से जांच हो ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और किसी भी प्रकार की धांधली न हो।

संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल

इस पूरे मामले में केसली के कृषि विभाग, खाद्य विभाग और अनुविभागीय राजस्व अधिकारी (एसडीएम) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि ऐसी शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों का यह कर्तव्य बनता है कि वे तुरंत मौके पर जाकर जांच करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। लेकिन ऐसा न होने से प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर कब तक शिकायतों और मीडिया में प्रकाशित खबरों के बावजूद प्रशासन इस महत्वपूर्ण खरीदी केंद्र की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करेगा।

निष्पक्ष जांच से हो सकती है वास्तविक स्थिति स्पष्ट

किसानों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि थावरी सहकारी समिति के मूंग खरीदी केंद्र की अचानक जांच कराई जाए। जांच के दौरान, खरीद रिकॉर्ड, तौल कांटे की प्रमाणिकता, किसानों को जारी की गई पर्चियां, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, स्टॉक रजिस्टर, कुल खरीदी गई मात्रा और भुगतान संबंधी सभी अभिलेखों का गहन मिलान किया जाना चाहिए। यदि इस जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो प्रशासन को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि किसानों के बीच फैले भ्रम और अविश्वास को दूर किया जा सके।

फिलहाल, किसानों की निगाहें केसली प्रशासन की ओर से की जाने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। इस पूरे मामले का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच होती है या फिर ये शिकायतें और प्रकाशित खबरें फाइलों में ही गुम होकर रह जाती हैं।