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तेंदुई गांव में श्रीकृष्ण जन्म कथा: कारागार में हुआ दिव्य प्रकाश

मीरजापुर के तेंदुई गांव में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की अद्भुत कथा सुनाई, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

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संवाददाता: शशि भूषण दूबे कंचनीय एवं गिरिजा शंकर त्रिपाठी
तेंदुई गांव में श्रीकृष्ण जन्म कथा: कारागार में हुआ दिव्य प्रकाश

संवाददाता: शशि भूषण दूबे कंचनीय एवं गिरिजा शंकर त्रिपाठी

द क्लिफ न्यूज़ | मीरजापुर | 4 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले के तेंदुई गांव स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की अद्भुत और अलौकिक कथा का श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति और आस्था में सराबोर हो गए। कथा व्यास पंडित पवन जी महाराज ने जब प्रभु के अवतरण की कथा सुनाई, तो पूरा कथा परिसर जयकारों से गूंज उठा।

कथा के प्रसंग में बताया गया कि जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के धरती पर अवतरण का समय निकट आया, सम्पूर्ण प्रकृति आनंदित हो उठी। नदियों का जल निर्मल हो गया, सरोवरों में कमल खिल उठे और वन-उपवन रंग-बिरंगे पुष्पों से महकने लगे। वातावरण शीतल और सुगंधित हवाओं से भर गया। देवगण, ऋषि-मुनि, किन्नर और गंधर्व मंगलगान करने लगे, तथा आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी। देवकी के मुख पर तेज और पवित्र मुस्कान को देखकर कंस ने समझ लिया कि उसके विनाश का कारण स्वयं भगवान विष्णु ने देवकी के गर्भ में ले लिया है।

कारागार में दिव्य प्रकाश से प्रकट हुए भगवान श्रीकृष्ण

कथा व्यास ने आगे वर्णन किया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने कारागार में जन्म लिया, तो संपूर्ण कारागार एक दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। वासुदेव ने अपने सम्मुख बाल रूप में चार भुजाओं वाले भगवान विष्णु को विराजमान देखा। प्रभु के हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल सुशोभित थे। वक्षस्थल पर श्रीवत्स, गले में कौस्तुभ मणि और शरीर पर पीतांबर धारण किए भगवान का सांवला स्वरूप वर्षाकालीन मेघ के समान अत्यंत मनोहारी दिखाई दे रहा था।

माता-पिता की प्रार्थना और ईश्वरीय स्वरूप का परिवर्तन

भगवान के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर वासुदेव और देवकी भावविभोर हो उठे। माता देवकी ने भगवान से कंस के भय से रक्षा करने की प्रार्थना की और उनसे अपना चतुर्भुज स्वरूप छिपाकर एक साधारण बालक का रूप धारण करने का आग्रह किया। कथा के इस मार्मिक और भावपूर्ण प्रसंग पर श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं और पूरा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।

श्रीमद्भागवत कथा के प्रमुख यजमान अंतर्राष्ट्रीय बाल संत संजय जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण मात्र से मानव जीवन का कल्याण हो जाता है और जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कथा समस्त दुखों का निवारण करती है।

कथा के अंत में अमर नाथ तिवारी व जानकी देवी द्वारा भगवान की आरती उतारी गई। इस अवसर पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बालेन्दु मणि त्रिपाठी, राज्य सभा सांसद प्रतिनिधि धनेन्द्र कुमार पाण्डेय, पूर्व प्रधान राजेश मिश्रा, अशोक त्रिपाठी और नवीन चंद त्रिपाठी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कथा का आयोजन श्रीश्री 1008 जानकी कुंज मंदिर में किया गया, जिसमें दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।