तेज बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था: फर्रुखाबाद में धूमधाम से हुआ गणेश विसर्जन
फर्रुखाबाद के कमालगंज में तेज बारिश के बावजूद गणेश विसर्जन यात्रा धूमधाम से हुई। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच प्रतिमा को पंचाल घाट पहुंचाया, जो...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 25 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद के कमालगंज कस्बे में गणेश महोत्सव का समापन शुक्रवार को भगवान गणेश की भव्य विदाई यात्रा के साथ हुआ। सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना और हवन के उपरांत गणपति की प्रतिमा को एक आकर्षक रथ पर विराजमान कर यात्रा आरंभ की गई। यात्रा के शुभारंभ के साथ ही क्षेत्र में तेज बारिश शुरू हो गई, किंतु इसने श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं किया। बारिश की बूंदों के बीच भी भक्त लगातार 'गणपति बप्पा मोरया' और 'अगले बरस तू जल्दी आ' के जयघोष लगाते हुए यात्रा में शामिल रहे, जो उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है।
कानपुर-फतेहगढ़ राजमार्ग पर स्थित दीपकेशरी माता मंदिर से विसर्जन यात्रा के रवाना होने के साथ ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यात्रा को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा थी। युवाओं और बच्चों की टोलियां डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों की धुन पर उत्साहपूर्वक नृत्य कर रही थीं। अनेक श्रद्धालु एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर भगवा ध्वज लहराते हुए अपनी श्रद्धा का प्रदर्शन कर रहे थे। इस वर्ष की विदाई यात्रा विशेष रूप से यादगार रही, क्योंकि प्रकृति की चुनौतियों के बावजूद भक्तों का जोश कम नहीं हुआ।
बारिश के बीच भी अटूट आस्था का प्रदर्शन
तेज बारिश ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया, वहीं कमालगंज के भक्तों का उत्साह रत्ती भर भी कम नहीं हुआ। भगवान गणेश की प्रतिमा को विदा करने का संकल्प इतना दृढ़ था कि बारिश की फुहारें भी उनके जोश को मंद न कर सकीं। यात्रा की शुरुआत से ही गणपति के जयकारे गूंजने लगे थे, जो बारिश के शोर को चीरकर आगे बढ़ रहे थे। श्रद्धालुओं की टोली में युवा, बच्चे और महिलाएं सभी शामिल थे, जो डीजे की धुन पर थिरकते हुए अपने प्रिय बप्पा को विदाई दे रहे थे। कई भक्तों ने एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर, भगवा ध्वज लहराते हुए अपनी भक्ति का अनूठा प्रदर्शन किया। यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि सामुदायिक एकता और उत्सव की भावना को भी दर्शाता है।
बारिश की बूंदों के बीच भी, भक्त अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे, मानो वे ईश्वर से प्रकृति की बाधाओं को पार करने की शक्ति मांग रहे हों। प्रतिमा के आगे चलने वाले स्वयंसेवकों ने यह सुनिश्चित किया कि हर कोई सुरक्षित रहे, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखा गया। इस दौरान, 'गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया' जैसे उद्घोष लगातार गूंजते रहे, जो बारिश के मौसम में भी आस्था के एक मजबूत स्तंभ के रूप में खड़े थे।
भव्य स्वागत और भक्तिमय माहौल
विसर्जन यात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर गणपति की प्रतिमा का स्वागत किया। गुलाब की पंखुड़ियों से सजी प्रतिमा का अभिनंदन करते हुए महिलाओं की टोलियां भी भक्ति गीतों पर नृत्य कर इस आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल रहीं। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल उड़ाकर बप्पा के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। रामलीला आरती वाले चौराहे पर प्रतिमा को एक विशाल माला पहनाकर स्वागत किया गया, जो इस उत्सव की भव्यता को दर्शाता है। रथ के साथ चल रहे भक्तों में प्रसाद पाने की भी उत्सुकता देखी गई, जो इस आयोजन के साथ जुड़ी हुई परंपराओं का हिस्सा है।
यह स्वागत केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि भगवान गणेश के प्रति असीम श्रद्धा और प्रेम का प्रकटीकरण था। हर गली, हर नुक्कड़ पर भक्तों ने बप्पा का अभिनंदन किया। खासकर बच्चों में इस उत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखा गया, वे अपने बप्पा को अगले साल फिर से घर लाने की उम्मीद में नाच-गा रहे थे। यह भक्तिमय माहौल केवल कमालगंज तक ही सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग इस विसर्जन यात्रा में शामिल होने पहुंचे थे, जिसने इसके महत्व को और बढ़ा दिया।
भावुक विदाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
गणपति की विदाई के क्षणों में कस्बे में कई भावुक दृश्य भी देखने को मिले। बप्पा को विदा करते समय अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, जो उनके प्रति गहरे लगाव को दर्शाती थीं। महिलाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए, स्वयंसेवकों ने सुरक्षा के लिए उनके चारों ओर रस्सी का घेरा बनाकर यात्रा को आगे बढ़ाया। कई महिलाएं अपने गोद में बच्चों को लिए हुए भी इस उत्साहपूर्ण यात्रा में शामिल थीं। तपस्वी वाले बाग स्थित मंदिर के पास महिलाओं को आगे जाने से रोका गया और उन्हें वापस भेज दिया गया, जिसके पश्चात पुरुष श्रद्धालु गणेश प्रतिमा को लेकर पंचाल घाट की ओर रवाना हुए। यह व्यवस्था भीड़ को नियंत्रित करने और सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी।
पुलिस-प्रशासन द्वारा विसर्जन यात्रा को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। लगभग तीन सौ पुलिसकर्मियों को विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया था। कमालगंज के अलावा थाना राजेपुर, मेरापुर और मोहम्मदाबाद सहित कई अन्य थानों का पुलिस बल भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया था। इन पुलिसकर्मियों ने यात्रा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने तथा यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ड्रोन कैमरों के माध्यम से भी निगरानी रखी गई, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
पंचाल घाट पर धार्मिक रीति-रिवाज
अंततः, पंचाल घाट पर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया। यह विसर्जन केवल एक रस्म नहीं थी, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभव था। भक्तों ने विधि-विधान से मंत्रोच्चार के बीच बप्पा को जल समाधि दी, और अगले वर्ष फिर आने की कामना की। गणेश महोत्सव के अंतिम दिन कमालगंज में सुबह से ही श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा। भक्तों ने अगले वर्ष फिर आने की कामना के साथ गणपति बप्पा को भावभीनी विदाई दी। यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्साह को दर्शाता है, बल्कि प्रतिकूल मौसम में भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमाण भी है।
पंचाल घाट पर विसर्जन के दौरान भी सुरक्षा बल मुस्तैद रहे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि विसर्जन प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो। स्थानीय प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूकता फैलाई, ताकि जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। इस प्रकार, कमालगंज में गणेश विसर्जन का यह पर्व सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने सभी के दिलों में श्रद्धा और उल्लास की एक नई लहर भर दी।
