टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग: तीनों आरोपी कोर्ट से जेल भेजे गए, 31 अक्टूबर तक हिरासत में
मुंबई की किला कोर्ट ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार तीनों शूटरों को 31 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने हथियारों की सप्लाई और मदद करने के आरोप में चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है।

द क्लिफ न्यूज़ | मुंबई | 21 अक्टूबर 2026
अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी के मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को मुंबई की किला कोर्ट ने 31 अक्टूबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद, पुलिस अब इन आरोपियों से पूछताछ कर इस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश करेगी। इस घटना के तार अमृतसर से लेकर मुंबई तक फैले बताए जा रहे हैं, और पुलिस हथियारों की आवाजाही, बिचौलियों की भूमिका और हमलावरों को भागने में मदद करने के प्रयासों की जांच कर रही है।
यह घटना 18 अक्टूबर की शाम को हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था। सूत्रों के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि हथियारों की सप्लाई में बिचौलियों की एक बड़ी भूमिका रही है। घटना के बाद हमलावरों को शहर से बाहर निकालने में मदद करने के कथित प्रयासों की भी पड़ताल की जा रही है।
हथियारों की सप्लाई में चार और की गिरफ्तारी
इस बीच, दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने हथियारों की सप्लाई करने और हमलावरों को भागने में मदद करने के आरोप में चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान हरियाणा के सोनीपत जिले के कुणाल (21) और सुमित (19), उत्तर प्रदेश के सीतापुर की राधा (23) और आजमगढ़ की बबीता (23) के रूप में हुई है। यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय राजधानी में हुई है और इससे मामले की जांच का दायरा और बढ़ गया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरफ्तार किए गए इन चारों लोगों की हथियारों की आवाजाही में कथित भूमिका की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कुणाल हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था। उसने एक दोस्त के माध्यम से अनिल पंडित से संपर्क साधा और फिर दोनों ने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के ज़रिए बातचीत शुरू की। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि अनिल पंडित के कहने पर कुणाल अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस लेकर आया था, जिसमें सुमित भी उसका साथी था।
हथियारों की मुंबई तक की यात्रा
पुलिस के मुताबिक, घटना से लगभग दो महीने पहले कुणाल की मुलाकात राधा से हुई थी। उसने कथित तौर पर राधा को अपनी गतिविधियों के बारे में बताया और बाद में उसे हथियार लेकर मुंबई जाने के लिए सहमत कर लिया। 15 अक्टूबर को कुणाल, राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन ले गया, जहां पिस्तौल कथित तौर पर राधा के बैग में रखी गई थी। 17 अक्टूबर को राधा और बबीता दादर पहुंचीं और एक होटल में ठहरीं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे, एक नाबालिग लड़के ने होटल के पास राधा से वह बैग ले लिया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस बैग को आगे किसने प्राप्त किया और फायरिंग की घटना में उसी हथियार का इस्तेमाल कैसे किया गया।
गोलीबारी की घटना 18 अक्टूबर की शाम को हुई थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, घटना के बाद अनिल पंडित ने कुणाल को सूचित किया कि शूटर मुंबई में फंसे हुए हैं और कथित तौर पर उनसे वहां से निकलने का इंतजाम करने को कहा। इसी दिन, राधा और बबीता कथित तौर पर हरिद्वार एक्सप्रेस से दादर से दिल्ली के लिए रवाना हुईं। इन महिलाओं को 20 अक्टूबर को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया, जबकि कुणाल और सुमित को सोनीपत में हिरासत में लिया गया।
आरोपियों की भागने की योजना
गोलीबारी की घटना के बाद आरोपी कथित तौर पर गुजरात के सूरत भाग गए थे, जहां से उन्होंने जयपुर जाने वाली एक ट्रेन पकड़ी। उनकी योजना कथित तौर पर बस से नई दिल्ली आने और फिर वहां से नेपाल भाग जाने की थी। हालांकि, पुलिस की सक्रियता के चलते उनकी यह योजना सफल नहीं हो सकी। मुंबई पुलिस ने इस मामले के सिलसिले में राजस्थान के कोटा से तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है, जो घटना में सीधे तौर पर शामिल थे।
इस मामले में बिश्नोई गैंग की संभावित संलिप्तता को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस इस संबंध में 200 से अधिक वॉयस सैंपल की जांच कर रही है, जिसके ऑडियो क्लिप से इस पूरे रैकेट का राज खुलने की उम्मीद है। यह मामला अब पुलिस की कस्टडी में है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इसमें और भी खुलासे होंगे।
