स्वायत्त वाहनों में जन कल्याण सर्वोपरि: भोपाल में विशेषज्ञों की राय
भोपाल के एनआईटीटीटीआर में आयोजित विशेष व्याख्यान में डॉ. राजेश तिवारी ने स्वायत्त वाहनों की तकनीक पर जोर दिया, जिसमें सामाजिक हित और सुरक्षा को...

Bhopal | संवाददाता: डॉ. पीके पुरोहित
द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 9 अक्टूबर 2026
भोपाल स्थित राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) में आयोजित एक विशेष व्याख्यान के दौरान स्वायत्त (ऑटोनॉमस) वाहनों के विकास में सामाजिक हित और जन कल्याण को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया गया। यूनाइटेड किंगडम के यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. राजेश तिवारी ने 'नेक्स्ट जनरेशन ऑटोनॉमस व्हीकल' तकनीक की भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि विज्ञान और तकनीक की सार्थकता तभी है जब उसका सीधा अनुप्रयोग समाज के व्यापक हित में हो।
डॉ. तिवारी ने स्वायत्त वाहनों की उन्नत नेविगेशन तकनीकों, मल्टी-सेंसर आधारित पोजिशनिंग प्रणालियों और वाहन-से-वाहन संचार (V2V) की उपयोगिता को रेखांकित किया। उनके अनुसार, ये आधुनिक प्रौद्योगिकियां भविष्य में सड़क सुरक्षा बढ़ाने, यातायात प्रबंधन को सुगम बनाने और ईंधन की बचत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, उन्होंने इन प्रणालियों के विकास में आने वाली चुनौतियों के प्रति भी आगाह किया।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता प्रमुख चिंताएं
डॉ. राजेश तिवारी ने स्वायत्त परिवहन प्रणालियों के विकास में साइबर सुरक्षा, संचार की विश्वसनीयता और पर्यावरण संरक्षण जैसी प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से वाहन-से-वाहन संचार के दौरान संभावित साइबर हमलों और डिजिटल गोपनीयता के उल्लंघन के जोखिमों पर चिंता व्यक्त की। डॉ. तिवारी के अनुसार, इन प्रणालियों को विकसित करते समय सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार के अनधिकृत हस्तक्षेप या डेटा उल्लंघन से बचा जा सके।
विद्यार्थियों को अनुसंधान के लिए प्रेरणा
एनआईटीटीटीआर के निदेशक प्रो. चन्द्र चारू त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य समाज के लिए उपयोगी और व्यावहारिक समाधान विकसित करना है। उन्होंने स्वायत्त वाहनों को भविष्य की एक महत्वपूर्ण तकनीक बताते हुए कहा कि इस तरह के विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा में प्रेरित करते हैं।
संस्थान के विज्ञान विभाग के अधिष्ठाता डॉ. पी.के. पुरोहित ने डॉ. राजेश तिवारी की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. तिवारी की सफलता यह दर्शाती है कि निरंतर परिश्रम और शोध के प्रति प्रतिबद्धता से विश्व स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है। ऐसे विशेषज्ञों का संस्थान से जुड़ना विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का विस्तार करने और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करने का एक अनमोल अवसर है। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सौमी चटर्जी द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन मेजर निशांत ओझा ने किया। इस व्याख्यान ने संस्थान के विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी दिशाओं और वैश्विक मानकों को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया है।
