स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने मांगी सेवा सुरक्षा और बेहतर वेतन, सौंपा ज्ञापन
बलरामपुर के अनुदानित महाविद्यालयों के 3000 से अधिक स्ववित्तपोषित शिक्षक 9 साल से विनियमितीकरण और सम्मानजनक वेतन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 16 सितंबर 2026
बलरामपुर के अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने बुधवार को अपनी लंबित सेवा संबंधी मांगों के तत्काल समाधान के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। शिक्षकों ने मुख्य रूप से सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा और विनियमितीकरण को अपनी प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया है।
यह ज्ञापन प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत लगभग 3000 शिक्षकों की समस्याओं को उजागर करता है, जो पिछले 25 वर्षों से एक 'दोहरी व्यवस्था' के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले नौ वर्षों से विनियमितीकरण अथवा उचित मानदेय की आस लगाए बैठे हैं। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि शिक्षकों को जीवनयापन के लिए सम्मानजनक वेतन और सेवा में स्थिरता प्रदान की जाए।
सेवा और वेतन संबंधी प्रमुख मांगें
ज्ञापन सौंपने वालों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदान की जा रही कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ तब तक अपर्याप्त है, जब तक कि उनकी सेवा संबंधी बुनियादी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल जाता। शिक्षकों का तर्क है कि वे महाविद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन लंबे समय से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी भी सेवा में स्थायित्व का इंतजार है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ सदस्य डॉ. के पी मिश्र ने इस बात पर जोर दिया कि इन शिक्षकों का अनुभव और समर्पण किसी भी स्थायी शिक्षक से कम नहीं है, फिर भी वे अनिश्चितता के माहौल में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह दोहरा मापदंड इन समर्पित शिक्षकों के साथ अन्याय है। इन्हें भी वही अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए जो नियमित कर्मचारियों को मिलती है।'
नौ वर्षों से विनियमितीकरण की प्रतीक्षा
इन स्ववित्तपोषित शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय विनियमितीकरण है, जिसकी मांग वे पिछले नौ वर्षों से उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है, जिससे उनकी भविष्य की अनिश्चितता और बढ़ गई है। डॉ. पंकज गुप्त और डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि केवल चिकित्सा सुविधाएँ देना पर्याप्त नहीं है; इनकी आर्थिक सुरक्षा और सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है।
सरकार से त्वरित निर्णय की अपेक्षा
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपते समय शिक्षकों ने सरकार से उनकी आर्थिक और सेवा संबंधी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय शैक्षिक महासंघ इकाई के अध्यक्ष प्रो. एस पी मिश्र, डॉ. एस के त्रिपाठी, डॉ. राजन सिंह, डॉ. सुनील कुमार शुक्ल और डॉ. अर्चना शुक्ला सहित कई अन्य शिक्षक इस अवसर पर उपस्थित रहे। शिक्षकों ने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन उनकी मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे महाविद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण भी बेहतर होगा और शिक्षक अधिक समर्पण से कार्य कर सकेंगे।
